राष्ट्र संत श्रमण संघीय उप-प्रवर्तक परम पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए भारत गौरव परम पूज्य डॉ. वरुण मुनि जी महाराज साहब ने भगवान महावीर जन्म जयंती के पावन अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं प्रदान कीं।
उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान महावीर की शिक्षाएं एवं सिद्धांत जितने प्राचीन काल में प्रासंगिक थे, उससे भी अधिक आज के वर्तमान युग में उनकी आवश्यकता अनुभव की जा रही है। आज पूरे विश्व में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं और मानवता एक संभावित वैश्विक संघर्ष की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। ऐसे चिंताजनक वातावरण में केवल अहिंसा ही शांति का मार्ग दिखा सकती है।
पूज्य गुरुदेव ने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। समाधान तो केवल भगवान महावीर द्वारा प्रदत्त पंचमहाव्रत—
अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह—के पालन में निहित है।
उन्होंने आगे कहा कि—
किसी भी जीव की हिंसा न करना (अहिंसा)
जीवन में सत्य का पालन करना
प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चोरी न करना (अचौर्य)
शील और सदाचार का पालन (ब्रह्मचर्य)
आवश्यकता से अधिक संचय न करना (अपरिग्रह)
—ये भगवान महावीर की मूल शिक्षाएं हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति इन सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाए, तो वह अपने परिवार, समाज, राष्ट्र और संपूर्ण विश्व को शांति की दिशा में अग्रसर कर सकता है।
पूज्य मुनि श्री ने भगवान महावीर द्वारा दिए गए अनेकांतवाद के सिद्धांत को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रायः मनुष्य अपनी बात को ही अंतिम सत्य मानकर आग्रह करता है, जबकि वास्तविकता यह है कि प्रत्येक विषय के अनेक आयाम हो सकते हैं। आवश्यक नहीं कि हम ही सदैव सही हों; दूसरों के दृष्टिकोण को भी समझने का प्रयास करना चाहिए। यही विचार सहिष्णुता और विश्व शांति का आधार है।
उन्होंने सभी से आह्वान किया कि इस पावन जन्म कल्याणक के अवसर पर हम संकल्प लें कि अपने जीवन में, परिवार में, समाज एवं राष्ट्र में शांति स्थापित करने हेतु कार्य करेंगे तथा किसी भी प्रकार से हिंसा, युद्ध, आतंकवाद, उग्रवाद एवं संप्रदायवाद को बढ़ावा नहीं देंगे।
इस अवसर पर मुनिरत्न कर्मयोगी श्री रुपेश सोनी जी महाराज ने मधुर गुरु भक्ति गीत की प्रस्तुति दी, जिससे सभा का वातावरण भक्तिमय हो गया। अंत में राष्ट्र संत उप-प्रवर्तक पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज के मंगल पाठ के साथ धर्मसभा का समापन हुआ।