भक्तामर की महिमा और प्रभु भक्ति का संदेश
नाकोड़ा अपार्टमेंट में गुजराती जैन संघ के महामंत्री श्री चेतन जी अजमेरा के निवास स्थान पर ओजस्वी प्रवचनकार भारत गौरव डॉ. श्री वरुण मुनि जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भक्ति, पूजा और साधना भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश में भगवान की पूजा, गुरु का सम्मान और अतिथि का आदर—ये तीनों हमारी सभ्यता के अद्भुत स्तंभ हैं। अतिथि को देवतुल्य मानना भारतीय संस्कृति की दिव्य और नैतिक विशेषता है।
मुनि श्री ने प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की स्तुति का उल्लेख करते हुए आचार्य मानतुंग द्वारा रचित भक्तामर स्तोत्र की दिव्य, चमत्कारी और कल्याणकारी महिमा का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा—“भक्तामर स्तोत्र केवल श्लोक नहीं, बल्कि भक्त की अखण्ड श्रद्धा का ऊर्जा–स्रोत है, जो आज भी प्रत्येक साधक परिवार के जीवन में प्रकाश, शांति और संरक्षण प्रदान करता है।”उन्होंने बताया कि प्रत्येक साधक द्वारा भोरकाल में उत्साह, उमंग और गहन श्रद्धा के साथ भक्तामर स्तोत्र का पाठ करना आत्मशुद्धि और मनोबल वृद्धि का श्रेष्ठ माध्यम है।
निष्काम भक्ति ही सर्वोच्च भक्ति है। अपनी प्रेरक वाणी में मुनि श्री ने कहा कि भगवान, भक्ति और प्रार्थना में निष्काम भाव सबसे महत्वपूर्ण है। भौतिक इच्छाओं की याचना करने के स्थान पर सादगी, सद्गुणों और मोक्ष पद प्राप्ति की मंगल कामना करनी चाहिए। संसार के भौतिक पदार्थ क्षणिक सुख देते हैं, परंतु सच्चा और अविनाशी सुख केवल मोक्ष में ही निहित है। उन्होंने कहा—“जब साधक भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण से प्रार्थना करता है, तब परमात्मा उसकी अंतरात्मा की पुकार अवश्य सुनते हैं और अपने आशीर्वाद से भक्त के जीवन को दिव्यता और आनंद से भर देते हैं।” भक्ति और पूजा का श्रेष्ठतम फल है — चित्त की प्रसन्नता।
निष्काम भाव से प्रभु के प्रति सम्पूर्ण समर्पण ही अखंड पूजा है।
भक्तों का उमड़ा सैलाब — विहार यात्रा का शुभारंभ राष्ट्र संत श्री पंकज गुरुदेव एवं भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज की विहार यात्रा प्रारंभ होने के शुभ अवसर पर धर्म सभा स्थल पर भक्तों का तांता दिनभर लगा रहा।श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर दर्शन किए, आशीर्वाद प्राप्त किया और विहार यात्रा के मंगल मार्ग की कामना की।पूरे परिसर में भक्ति, उत्साह, भाव-विभोरता और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण व्याप्त रहा। भजन, एवं संचालन मधुर वक्ता मुनिरत्न श्री रूपेश मुनि जी ने दिव्य भजन प्रस्तुत कर सभा को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
उप प्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी म.सा. ने सभी को मंगल पाठ प्रदान किया।
इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य व्यक्तियों, श्रद्धालुओं एवं युवाओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।