Share This Post

Featured News / Featured Slider / ज्ञान वाणी

जीवन-परिवर्तन का पथ:भारत गौरव वरुण मुनि महाराज

जीवन-परिवर्तन का पथ:भारत गौरव वरुण मुनि महाराज

भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन से श्रद्धालु जनमानस को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया। सभागार में श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति यह दर्शा रही थी कि समाज में धर्म, सत्संग और साधना के प्रति गहरी आस्था निरंतर बढ़ रही है।

मुनि श्री ने अपने प्रवचन के आरंभ में कहा कि—“जीवन में परिवर्तन तभी संभव है जब मनुष्य अपनी भूलों को सहजता से स्वीकार कर सही दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प ले।” उन्होंने बताया कि सच्चा जीवन-परिवर्तन किसी बाहरी चमत्कार का परिणाम नहीं होता, बल्कि वह आत्म-जागरण, सत्संग, सद्विचार और निरंतर आत्म-साधना का फल होता है। उन्होंने यह भी कहा कि मनुष्य का अंतर्मन ही उसके जीवन की दिशा निर्धारित करता है; यदि मन पवित्र, शांत और संयमित हो तो जीवन स्वयं ही उज्ज्वल हो जाता है। भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज ने विशेष रूप से चार बातों पर बल दिया—

विचारों की पवित्रता – “विचार ही हमारे कर्मों को जन्म देते हैं। अतः शुद्ध विचार अपनाएँ और अपवित्र संकल्पों से दूरी बनाएँ।”

संयम और अनुशासन – “अनियंत्रित जीवन दुःख का कारण है, जबकि अनुशासन हर सफल और सुखी जीवन का आधार है।”

सत्संग का महत्त्व – “सत्संग मनुष्य के भीतर सोया हुआ विवेक जागृत करता है। जिस घर में सत्संग होता है, वहाँ कलह और कषाय टिक नहीं सकते।”

करुणा और अहिंसा – “दूसरों के प्रति करुणा, सेवा और सहानुभूति जीवन को महान बनाती है। जो हृदय दूसरों के लिए धड़कता है, वही वास्तव में श्रेष्ठ है।”मुनि श्री ने उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे सूर्य अपनी रोशनी से अंधकार को दूर कर देता है, उसी प्रकार सद्गुरु का उपदेश जीवन के अज्ञान-अंधकार को समाप्त करने की शक्ति रखता है।

सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने बताया कि आज का प्रवचन उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा और उन्होंने इसे जीवन में उतारने का संकल्प लिया।धर्मसभा के अंत में मुनि श्री ने सभी को आशीर्वचन देकर कहा—“धर्म केवल सुनने की वस्तु नहीं, वह आत्मा में धारण करने का गुण है। जो धर्म को व्यवहार में उतारता है, वही वास्तव में जीवन-परिवर्तन के पथ पर अग्रसर होता है।” सभा में मधुर वक्ता मुनिरत्न श्री रूपेश मुनि जी ने दिव्य भजन प्रस्तुत कर सभा को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।

उप प्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी म.सा. ने सभी को मंगल पाठ प्रदान किया।

इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य व्यक्तियों, श्रद्धालुओं एवं युवाओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। जैन समाज के पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में महिलाएँ, युवा और बालक-बालिकाएँ उपस्थित रहे।

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

Skip to toolbar