भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी के प्रवचनों ने समाज को दी संयम, सेवा और संस्कार की प्रेरणा
बैंगलुरू। श्रुताचार्य श्री गुरु अमर संयम अमृत वर्ष के पावन अवसर पर आयोजित गुरु अमर धार्मिक चित्रकला प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा रविवार को एक भव्य समारोह में की गई।यह आयोजन श्री गुजराती वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ, गांधीनगर (बैंगलुरू) के तत्वावधान में, राष्ट्र संत उपप्रवर्तक पूज्य श्री पंकज मुनि जी म.सा. एवं भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी म.सा. के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ।भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज ने अपने प्रेरक प्रवचन में कहा —“कला केवल रंगों का मेल नहीं, यह आत्मा की साधना है। जब कला धर्म से जुड़ती है, तो वह समाज में चेतना, संस्कार और संवेदना का संचार करती है।
”महाराजश्री ने आगे कहा —“धर्म का अर्थ केवल मंदिर की सीमा तक सीमित नहीं, बल्कि वह हमारे जीवन के हर कर्म में झलकना चाहिए। जब व्यक्ति शाकाहार अपनाता है, नशा त्यागता है, सामायिक करता है और स्वाध्याय से जुड़ता है — तब वही सच्चे अर्थों में धर्म का साधक बनता है। ”उन्होंने सात संदेशों — शाकाहार, नशामुक्ति, सामायिक, स्वाध्याय, साधर्मी सेवा, विद्वत सम्मान और जीव दया — को समाज में जीवंत बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि “ये सात संदेश समाज के सात दीपक हैं, जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का मार्ग दिखाते हैं।”
महाराजश्री ने यह भी कहा —“आज की पीढ़ी मोबाइल और आधुनिक साधनों में डूबी है। यदि वह अपने भीतर की शक्ति को पहचान ले और धर्म के रंगों में अपने जीवन को रंग दे, तो वही उसका सच्चा उत्थान होगा। आत्म-संयम, करुणा और सेवा भाव ही जीवन की वास्तविक सजावट है।”
कार्यक्रम के दौरान विजेताओं के नामों की घोषणा की गई —प्रथम स्थान: डिंपल वीरेन शाह
द्वितीय स्थान: इंदू बहन दोशी
तृतीय स्थान: हंसा बहन आर. मोदी
इसके अतिरिक्त प्रियांश दलाल, तारा दलाल, लता बहन/रमेश भाई पिपरिया सहित सभी प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।राष्ट्र संत उपप्रवर्तक पूज्य श्री पंकज मुनि जी म.सा. ने भी अपने आशीर्वचन में कहा —“जब धर्म और कला का संगम होता है, तब समाज में नई ऊर्जा का संचार होता है। बच्चों की रचनाओं में संयम और संस्कृति के जो रंग झलके हैं, वे भविष्य के उज्ज्वल भारत का संकेत हैं। ”समारोह में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं, बालक-बालिकाएं एवं समाज के वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। पूरा आयोजन भक्ति, प्रेरणा और सृजन के रंगों से सराबोर रहा, जिसने समाज में सात संदेशों का सजीव इंद्रधनुष फैला दिया।