Share This Post

Featured News / Featured Slider / ज्ञान वाणी

कल्पसूत्र ग्रंथ परमात्मा के जीवन चरित्र से परिपूर्ण है: डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.

कल्पसूत्र ग्रंथ परमात्मा के जीवन चरित्र से परिपूर्ण है: डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.

     स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई

विश्व हितेषी प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न, राष्ट्रसंत, विश्व हितकांक्षी, यूग प्रभवक श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा. के प्रवचन के अंश

   🪔 *विषय : प्रभु वीर का वीरता पूर्ण वैभव*🪔

~ श्री कल्पसूत्र ग्रंथ सर्व ग्रंथो में सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है क्योंकि ये ग्रंथ परमात्मा के जीवन चरित्र से परिपूर्ण है।

~ श्री कल्पसूत्र ग्रंथ के सुनने मात्र से स्वयं की ज्ञान दशा प्रकृष्ठ रूप से जागृत होती ही है और ज्ञान दशा के प्रबलता से 8 भवमें मुक्ति हो ही सकती है।

~ जब तक साधक स्वयं के जीवन में चेतना का ज्ञान यानी सम्यक् दर्शन की प्राप्ति नहीं करता है तब तक मोक्ष का प्रारंभ प्रकट नहीं होता है।

~ प्रभु महावीर स्वामी ने भी नयसार के भव में सम्यक्तव प्राप्त करने के बाद ही संसार के अंत का आरंभ किया था लेकिन हमारे संसार का अंत कब होगा?

~ प्रभु महावीर स्वामी ने भी सम्यक्तव प्राप्त किया उसका मूल कारण था कि मुनि भगवंत को देखकर अद्भुत बहुमान भाव और आहार दान था।

~ प्रभु वीर के परमसाधकों को हर पल सभी परिस्थिति में अज्ञान दशा के क्षय का, कर्मबंध के नाश का ही प्रबल पराक्रम करना ही चाहिए।

पंचम काल में मानव से प्रमाद, अज्ञानताप्रचुर मात्रा में तथा ज्ञानदशा और श्रद्धा कमजोर होने के कारण पाप हो या ना हो प्रतिक्रमण करना ही चाहिए।

~ प्रभु वीर ने मरीचि के भव में स्वयं के तीर्थंकरपद, चक्रवर्तीपद, वासुदेवपद का मद किया इसके मूल रूप नीच गोत्र में जाना निश्चित हुआ…हमारे भीतर में कुलका, बल का, रूप का, ज्ञान का मद होगा तो हमारी कौन सी गति होगी?

    *”जय जिनेंद्र-जय गुरुदेव”*

🏫 *श्री राजेन्द्रसुरीश्वरजी जैन ट्रस्ट, चेन्नई*🇳🇪

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

Skip to toolbar