“सुख प्राप्ति का प्रथम सोपान है अन्नदानम्। नर सेवा ही नारायण सेवा है और जन सेवा ही जिनेंद्र भगवान की सच्ची सेवा है।” — ऐसे मंगल विचार भारत गौरव परम पूज्य डॉ. वरुण मुनि जी महाराज ने राजाजीनगर जैन स्थानक में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।उन्होंने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में कहा कि संसार का प्रत्येक व्यक्ति सुख पाना चाहता है और प्रभु महावीर ने सुख प्राप्ति के नौ उपाय बताए हैं, जिनमें प्रथम उपाय अन्न का दान है। लोग मंदिरों में जल, फल, नैवेद्य, छप्पन भोग आदि चढ़ाते हैं, जो श्रद्धा का विषय है; किंतु यदि कोई भूखे को भोजन तथा प्यासे को जल पिलाता है, तो यह भेंट निश्चय ही प्रभु तक अवश्य पहुँचती है।महाराज श्री ने समाज में व्याप्त प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालते हुए कहा — “हम देखते हैं कि विवाह, धार्मिक समारोहों और मृत्यु भोजों में बड़े-बड़े भंडारे और प्रसादी के आयोजन किए जाते हैं, परंतु जब किसी भूखे को भोजन कराने की बात आती है, तो व्यक्ति कई बार सोचता है।
जैसे समुद्र में वर्षा का कोई विशेष महत्व नहीं, वैसे ही जो पहले से ही सम्पन्न हैं, उन्हें भोजन कराना केवल औपचारिकता है। जबकि असली पुण्य तो उस भूखे व्यक्ति को भोजन कराने में है जो रात्रि को भूखा सो जाता है।”उन्होंने आगे कहा — “मेरे आराध्य गुरुदेव प्रवर्तक श्री अमर मुनि जी महाराज कहा करते थे कि मेरे जीवन का लक्ष्य है — दुनिया में कोई भी व्यक्ति रात्रि को भूखा न सोए। इसी भाव से उन्होंने उत्तर भारत के विभिन्न प्रांतों — दिल्ली, हरियाणा, पंजाब आदि में अन्नदान की प्रेरणा दी।”
इसी सद्प्रेरणा से वर्ष 2024 के चातुर्मास में राजाजीनगर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ द्वारा आरंभ किया गया अन्नप्रसादम सेवा कार्य आज भी निरंतर गतिमान है। संघ के प्रमुख सहयोगी सभी सदस्यों ने श्रद्धा व भक्ति से इस सेवा में सहभागिता की है।इस अवसर पर संघ के अध्यक्ष श्री प्रकाश जी चानोदिया, उपाध्यक्ष श्री रोशनलाल जी नाहर, महामंत्री श्री नेमीचंद जी दलाल, कोषाध्यक्ष श्री प्रसन्न जी तथा सहमंत्री श्री राकेश जी दलाल सहित समाज के कर्मठ कार्यकर्ता श्री ज्ञानचंद जी लोढ़ा आदि ने सेवा कार्य को गति प्रदान की।
युवारत्न श्री धीरज जी नाहर ने बताया कि “पूज्य देवों के आशीर्वाद से यह अन्नप्रसादम सेवा में सभी वर्गों — हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई — के लोग समान रूप से प्रसाद लेते हैं। जब भूखे, जरूरतमंद व निर्धन जन इस गुरु-कृपा प्रसाद को ग्रहण करते हैं, उनके चेहरों की प्रसन्नता हमें आत्मिक संतोष का अनुभव कराती है।”
मुनिरत्न श्री रूपेश जी महाराज ने सभी दानदाता परिवारों को साधुवाद देते हुए कहा कि “आपका योगदान जनसेवा के इस यज्ञ को सतत आगे बढ़ा रहा है।”कार्यक्रम का समापन राष्ट्रसंत उप प्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी महाराज के मंगल पाठ के साथ हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद प्राप्त कर स्वयं को धन्य अनुभव किया।उल्लेखनीय है कि 13 नवंबर को गुरु अमर पुण्य स्मृति के पावन अवसर पर श्री मान सा अमरचंद जी गांधी ( राजा जी नगर) व श्रीमती मनीषा बेन कोठारी (एलंका निवासी) के निवास स्थान पर नवकार मंत्र का अखंड जाप आयोजित किया जा रहा है। इस भक्तिमय आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर अपने जप की आहुति भक्ति के इस महायज्ञ में अर्पित करेंगे।