साहूकारपेट के बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन में आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हीराचंद्रजी म.सा भावी आचार्य पूज्यश्री महेन्द्रमुनिजी म.सा की आज्ञानुवर्तिनी विदुषी महासतीजी सुशीलाकवरजी म.सा की सुशिष्या प्रभावतीजी म.सा ( माताजी म.सा ) के आदर्शमय नौ दिवसीय संथारा को अजमेर में समाधिपूर्वक पूर्ण होने के मंगलमय अवसर पर गुरुवार 22 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजे से नवकार महामन्त्र का जाप रखा गया |
उपस्थित श्रद्धालुओं ने तरुणजी बोहरा तीर्थ द्वारा रचित नवकार चालीसा की स्तुति की सामूहिक रुप से स्तुति की | नवकार महामंत्र का सामूहिक जाप करने के पश्चात हस्ती चालीसा की सामूहिक स्तुति की गयी |
संथारा साधिका के सांसारिक पुत्रियों पुत्रवधुओं व पौत्री ने साधिका की पुत्री महासतीजी श्री सरलेशप्रभाजी म.सा द्वारा रचित संथारा पर गीतिकाओं की सामूहिक स्तुति की |
संथारा साधिका के सांसारिक पुत्र आर वीरेन्द्रजी कांकरिया ने नौ दिवसीय संथारा के आंखों देखे दृश्यों का सुन्दर रुप में धर्म सभा में वर्णन करते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही |
संथारे के समय अजमेर में उपस्थित युवक परिषद् तमिलनाडु के शाखा प्रमुख सन्दीपजी ओस्तवाल ने साध्वी प्रभावतीजी म.सा के सांसारिक जीवन का परिचय देते हुए उनके सांसारिक कांकरिया परिवार के हर सदस्य का व्यक्तिश: उल्लेख करते हुए संघ में उनके द्वारा नियमित प्राप्त हो रहे योगदान पर विस्तृत प्रकाश किया |
संथारा साधिका महासतीजी के सांसारिक पुत्र आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने मातुश्री के गृहस्थ अवस्था में निर्लिप्त जीवन का उल्लेख करते हुए दृढ़ता पूर्वक संयम पालन पर भाव विभोर करने वाले भाव रखें व कहा कि आचार्य हस्ती की कृपा पात्र माताजी म.सा ने भी आचार्य हस्ती की तरह तेले की तपस्या के साथ संथारा ग्रहण किया | इस अवसर पर उन्होंने अपने पूज्य पिताश्री रिखबचंदजी कांकरिया से प्राप्त प्रेरणाओं व संस्कारों उल्लेख करते हुए कृतज्ञता भाव रखें व बहन श्री सरलेशप्रभाजी म.सा व श्री विनयप्रभाजी म.सा के द्वारा अजमेर में सम्पन्न गुणानुवाद सभा में रखे गए भावों को धर्मसभा में रखा व कांकरिया परिवार की ओर से सभी उपस्थित श्रावक- श्राविकाओं के प्रति आभार व्यक्त किया | आप आचार्य हस्तीमलजी म.सा के प्रिय आगम नंदी सूत्र का दैनिक स्वाध्याय करते थे व आचार्य हीराचंद्रजी म.सा दीक्षा अर्द्ध शताब्दी वर्ष में नियमित रुप से दैनिक पांच से सात बार नंदी सूत्र का स्वाध्याय करते थे |
अखिल भारतीय श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पी एस सा सुराणा ने महासतीजी प्रभावतीजी म.सा के दृढ़ता पूर्वक ग्रहण किये गए संथारे को रत्नवंश की गौरवशाली परम्परा का स्वर्णिम इतिहास बताते हुए वीरपिता श्री रिखबचंदजी कांकरिया द्वारा अपनी दो सुपुत्रियों व धर्म सहायिका को जिनशासन की सेवा में समर्पित कर देने को गुरुभक्ति का श्रेष्ठतम उदाहरण बताते हुए महासतीजी म.सा के सांसारिक परिवार के स्वाध्याय भवन साहूकारपेट में चल रही नियमित गतिविधियों में योगदान हेतु साधुवाद ज्ञापित करते हुए मंगल पाठ सुनाया | संघ के पूर्व मंत्री ज्ञानचन्दजी बागमार ने महापुरुषों व संथारा साधिका महासतीजी प्रभावतीजी की जयजयकार की |
संथारा साधिका श्री प्रभावतीजी के गुणानुवाद रुप नवकार महामंत्र के जाप में महासतीजी के सांसारिक पक्ष में जेठानीजी देवरानीजी पुत्र पुत्रियां पौत्र पौत्री दोहित्र बहिन भतीजे भानजे व प्रकाशचंदजी ओस्तवाल सुगनचंद बोथरा विमलचंदजी सुराणा साहित्यिक दिलीप धींग साहूकारपेट संघ के प्रवक्ता अजितजी कोठारी अभयजी सुराणा उच्छबराजजी गांग गौतमचंदजी मुणोत मांगीलाल जी छल्लानी श्रीपालजी सुराणा नेमीचंदजी कर्णावट सोहनलालजी झामड कमलजी चोरडिया कमलजी छल्लानी राजेन्द्रजी सांखला जवाहरलालजी कर्णावट रंगरुपमलजी चोरडिया भवरलाल जी लोढा रमेशजी झांगड़ा मनोजजी चौधरी महावीरचन्दजी छाजेड़ अम्बालालजी कर्णावट महावीरजी बागमार योगेशजी श्रीश्रीमाल महेन्द्रजी बोहरा महावीरजी कर्णावट वीरेन्द्रजी ओस्तवाल भरतजी बागमार सुनीलजी बोथरा सुनीलजी ओस्तवाल मुकेशजी गुलेच्छा दिनेशजी सुराणा अशोकजी लोढा अशोकजी बागमार विनीतजी गनपतराजजी बाफना रतनलालजी मालू श्री जैन रत्न श्राविका मण्डल राष्ट्रीय अध्यक्षा व श्राविका मण्डल तमिलनाडु के परामर्शदाता,कार्याध्यक्षा,पदाधिकारीगण व सदस्याओं सहित चेन्नई महानगर के अनेक क्षेत्रों से श्रावक – श्राविकाएं सामायिक परिवेश में उपस्थित थे |