राष्ट्र संत श्रमण संघीय उपप्रवर्तक परम पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज साहब के पावन सानिध्य में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ, आलंदी (संत ज्ञानेश्वर नगरी) के तत्वावधान में होली चातुर्मास की आराधना जप-तप एवं साधना के साथ हर्षोल्लासपूर्वक संपन्न हुई।
इस अवसर पर भारत गौरव परम पूज्य डॉ. श्री वरुण मुनि जी महाराज साहब ने चार दिवसीय मौन साधना के पश्चात विशेष बीज मंत्रों के साथ पाँच महामंगल पाठ प्रदान किए। कार्यक्रम में आकुर्डी, निगड़ी प्राधिकरण, चिंचवड़ स्टेशन तथा चिंचवड़ गांव सहित विभिन्न क्षेत्रों से अनेक श्रद्धालु भाई-बहन बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए भारत गौरव डॉ. श्री वरुण मुनि जी महाराज साहब ने कहा कि भारत देश पर्व-त्योहारों की पावन भूमि है। प्रत्येक पर्व हमारी सभ्यता और संस्कृति का प्रतीक होता है। होली का पर्व आपसी भाईचारे और प्रेम का संदेश देता है।
उन्होंने पंच परमेष्ठी भगवान के रंगों का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि अरिहंत भगवान का सफेद रंग शांति का प्रतीक है, सिद्ध भगवान का लाल रंग शक्ति और समृद्धि का प्रतीक है, आचार्य भगवंत का पीला रंग ज्ञान का प्रतीक है, उपाध्याय भगवंत का हरा रंग स्वास्थ्य का प्रतीक है तथा साधु-संतों का श्याम वर्ण प्रेम का प्रतीक होता है। उन्होंने मंगलकामना व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के जीवन में शांति, शक्ति, ज्ञान, स्वास्थ्य और प्रेम का संचार हो।
इस अवसर पर मुनि रत्न कर्मयोगी श्री रुपेश मुनि जी महाराज साहब ने मधुर गुरुभक्ति गीत प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर सभी श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
धर्मसभा में तप साम्राज्ञी मीराबाई लुनिया जी (पुणे) विशेष रूप से उपस्थित रहीं, जो पिछले 39 वर्षों से एकासन तप का पालन कर रही हैं। श्री संघ की ओर से उनका विशेष बहुमान किया गया।
कार्यक्रम में श्री संघ के अध्यक्ष श्री सुरेश जी वडगांवकर को पूज्य गुरु भगवंत द्वारा जपमाला भेंट की गई। साथ ही श्री संजय जी कर्णावट, विशाल जी लोढा, दिलीप जी लोढा, सुरेखा बहन कटारिया, डॉ. श्वेता जी राठौड़ सहित अनेक गुरु भक्तों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर धर्मस्थान में सेवा करने वाले भाई-बहनों को वस्त्रदान भी किया गया। आलंदी के श्रद्धालु भाई-बहनों ने बड़ी संख्या में पूज्य गुरु भगवंत के श्रीमुख से मंगल पाठ श्रवण कर स्वयं को धन्य अनुभव किया।
समारोह के उपरांत गुरुभक्त चोपड़ा परिवार की ओर से अल्पाहार की व्यवस्था की गई। अंत में राष्ट्र संत परम पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज साहब के श्रीमुख से मंगल पाठ का आशीर्वाद प्रदान किया गया। दोपहर पश्चात पूज्य गुरु भगवंतों ने वहां से विहार कर श्री मदन जी वेदमूथा के निवास स्थान पर रात्रि विश्राम किया तथा अगले दिन पूज्य गुरु भगवंत तपसूर्या मीराबाई जी लुनिया के निवास स्थान पर पधारे।




