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सुख में साथी नहीं बनना चाहिये, दुःख में साथ देना चाहिये- महासति श्री दिव्यज्योतिजी म.सा.

सुख में साथी नहीं बनना चाहिये, दुःख में साथ देना चाहिये- महासति श्री दिव्यज्योतिजी म.सा.

नागदा जं. निप्र- मीडिया प्रभारी महेन्द्र कांठेड़ एवं नितिन बुडावनवाला ने बताया कि धर्मसभा में महासति श्री दिव्यज्योतिजी म.सा. एवं पूज्य काव्याश्रीजी म.सा. ने कहा कि वर्तमान में सुख में सब साथ होते है परन्तु दुःख में कोई साथ नहीं होता। लेकिन जिनवाणी कहती है कि सुख में साथी बनिये अथवा मत बनिये लेकिन जब किसी के उपर दुःख, तकलीफ या समस्या हो उसका साथ अवश्य देना चाहिये एवं उसके निराकरण्एा हेतु जितना प्रयास कर सकते है उससे ज्यादा करना चाहिये। महासति ने आगे कहा कि आत्मा लगातार शरीर बदलती रहती है लेकिन थकती नहीं है। आत्मा में अनंत सुख है, आत्मा कभी भी दुःखी नहीं होती है लेकिन हम किसी को सुख देंगे तो सुख मिलेगा, दुःख देंगे तो दुःख मिलेगा। गुरूदेव ने आगे बताया कि मानव जीवन में ब्रम्हचर्य का अनंत महत्व है। यह महापुरूषो का गहना होती है। यह शूरवीरों का काम है इससे हमें अनंत उर्जा प्राप्त होती है।

 मीडिया प्रभारी ने बताया कि तपस्या के अंतर्गत 10 उपवास श्रीमती मधुबाला निर्मल चपलोत के, तीन उपवास रेशमबेन भटेवरा के चल रहे है। धर्मचक्र तपस्या सुरेन्द्र पितलीया के चल रहे है। महावीर भवन में पूरे वर्ष की जल की व्यवस्था स्व. मौढूलालजी की प्रेरणा से आशीष पोखरना द्वारा की जायेगी। जाप की प्रभावना का लाभ श्रीमती कान्ताबाई छिपानी एवं आनंद चालीसा पाठ की प्रभावना का लाभ सरोज बहन लुणावत सांवेरवाला ने लिया। अतिथि सत्कार का लाभ राजेन्द्र कांठेड़ ने लिया। संचालन अनिल पावेचा ने किया। आभार प्रकाशचन्द्र जैन लुणावत एवं सतीश सांवेरवाला ने माना।

 धर्मसभा में प्रशांत नाहर, सागरमल भण्डारी, देवेन्द्र कांठेड, रमेश तांतेड, सुशील कांठेड, सुनील वौरा, सुनिल पितलीया, दिलीप कांठेड, विजय पितलीया, योगेन्द्र बोहरा, संगीता चपलोत, मेघा कांठेड, प्रिया नवादावाला, सौनल कांठेड, सारिका कर्नावट, मनोरमा भण्डारी आदि उपस्थित थे।

दिनांक 21/07/2022 मीडिया प्रभारी

                महेन्द्र कांठेड

           नितिन बुडावनवाला

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