कुष्ठ आश्रम में श्रीसंघ साहुकारपेट ने मनाया दिपावली पर्व
Sagevaani.com /Chennai। मानव की प्रतिष्ठा में ही धर्म है।कोई भी धर्म श्रेष्ठ और महान हो सकता है, लेकिन मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता। गुरूवार जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने श्रीसंघ साहुकारपेट के सभी पदाधिकारियों को कुष्ठ आश्रम में कुष्ठ रोगियों की सेवा कार्य केलिए साधूवाद देतें हुए कहा कि मानव सेवा ही सच्ची सेवा है गरीब लोगों के बीच भी खुशियों को बांटना सबसे बड़ा पुण्य और नेक कार्य हैऔर इससे बड़ा संसार में धर्म नहींं हो सकता है।परोपकार ही असल मायने में ईश्वर की सेवा करना है। बाकी संसार में कुछ भी नहीं है।सच्ची ईशोपासना यह है कि हम अपने मानव-बंधुओं की सेवा में अपना पूरा जीवन लगा दिया तो मानव जीवन सफल बन जाएगा और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी। साध्वी स्नेहप्रभा ने कहा कि मनुष्य इंसानियत और मानव धर्म के संस्कार के साथ इस दुनिया में जन्म लेता है। लेकिन अज्ञानता और कुसंगत के आभाव में मानव धर्म को भूल जाता है।मगर इंसानियत और मानवता से बढ़कर इस दुनिया में कोई धर्म नहीं है। औरों को खुशियां देने और बांटने पर जो आनन्द और खुशी जो जीवन में मिलती है वह किसी और वस्तु को पाकर भी नहीं मिल सकती है। मानव होकर मानवीयता धर्म निभाने वाला व्यक्ति संसार में महान बनता है।श्रीसंघ साहुकारपेट के कार्याध्यक्ष महावीरचंद सिसोदिया ने जानकारी देतें हुए बताया महासती धर्मप्रभा जी,साध्वी स्नेहप्रभा की प्रेरणा और यशस्वी चातुर्मास के उपलक्ष्य में सिंह पेरूमल कोइल के समीप कुष्ठ आश्रम पहुंचकर वहां रह रहे कुष्ठ रोग से बिमार असाय भाई और बहनों के साथ साहुकार पेट श्री एस.एस.जैन संघ के अध्यक्ष एम. अजितराज कोठारी,सुरेश डूगरवाल,हस्तीमल खटोड़,शम्भूसिंह कावड़िया,शांतिलाल पंगारिया, मंत्री सज्जनराज सुराणा आदि पदाधिकारियों ने कुष्ठ आश्रम मे दिपावली सांझा करते हुए कुष्ठ रोगियों को वस्त्र एवं, मिठाईया और जरूरत का सामान भेंट किए और दिपावली की खुशियां सांझा की।
प्रवक्ता सुनिल चपलोत,
श्रीएस.एस. जैन संघ, साहुकारपेट, चैन्नई