साधु-संत गुलाब जैसे—सभी को समान सुगंध देते हैं
“संत चलते-फिरते तीर्थ के समान होते हैं, जिनकी चरण-रज से तीर्थ भी पावन हो जाते हैं।” यह मंगलमय उद्बोधन भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि साधु-संत गुलाब के कोमल और सुगंधित फूल के समान होते हैं—जहां भी जाते हैं, वहां ज्ञान, धर्म, प्रेम, भक्ति और सेवा की सुगंध समान भाव से वितरित करते हैं। जिस प्रकार गुलाब का पुष्प बिना किसी भेदभाव के सभी को अपनी सुगंध देता है, उसी प्रकार साधु-संत, अमीर-गरीब, शिक्षित-अनभिज्ञ, बड़े-छोटे सभी को समभाव से कृपा, आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। डॉ. वरुण मुनि जी ने कहा कि संतों का प्रत्येक कदम लोक-कल्याणकारी होता है। वे नगर-नगर, ग्राम-ग्राम जाकर प्रवचन, सत्संग और धर्मप्रचार के माध्यम से प्रभु-भक्ति, नैतिकता, संयम और जीवन-मूल्यों की अमूल्य शिक्षा जन-जन तक पहुंचाते हैं।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्र संत उपप्रवर्तक परम पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज, भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज एवं मुनिरत्न श्री रूपेश मुनि जी महाराज वर्ष 2025 का गांधीनगर चातुर्मास संपन्न कर राजाजी नगर, श्री सुशील धाम, हिलटॉप, कामधेनु, फतेह मार्बल आदि क्षेत्रों को पावनता प्रदान करते हुए कृष्णागिरी तीर्थ धाम पधारे। पूज्य गुरुदेव ने बताया कि श्री उगमराज जी लुणावत के प्रतिष्ठान, कमल जी गिरिया तथा अन्य अनेक श्रद्धालु परिवारों ने जहां-जहां भी संतों का विश्राम हुआ, वहां तन-मन-धन से समर्पित सेवाभाव का दिव्य उदाहरण प्रस्तुत किया। लगभग आठ महीनों से इस मार्ग पर विभिन्न संप्रदायों के साधु-साध्वी भगवंतों का निरंतर आगमन होता रहा है, और ये परिवार निष्ठा, भक्ति तथा समर्पण से अपना पुण्य-संचय बढ़ा रहे हैं—साथ ही मानवता और धर्म शासन की अनमोल सेवा भी कर रहे हैं। मुनिरत्न श्री रूपेश मुनि जी महाराज ने भावपूर्ण भजनों द्वारा सभा को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
उन्होंने कहा कि चाहे उत्तर भारत हो या दक्षिण भारत—तपस्या करने वालों, दान देने वालों और सेवा में तत्पर रहने वालों का अधिक से अधिक अनुमोदन करना ही उनकी विशेष भावना रहती है, जिससे समाज में प्रेरणा का संचार होता है। उपप्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी म.सा. ने मंगल पाठ द्वारा समस्त उपस्थित जनसमुदाय को आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य व्यक्तियों, पदाधिकारियों, महिलाओं, युवाओं और बालक-बालिकाओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।अंत में सभी ने यही प्रार्थना की कि —“प्रभु उन्हें ऐसी शक्ति व ऐसी भक्ति प्रदान करें कि वे सेवा, समर्पण और धर्म की इस मंगलमयी यात्रा में निरंतर आगे बढ़ते रहें, जिससे एक सुंदर समाज और एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण हो सके।”