पूज्य संतों के आगमन से धर्मधारा हुई प्रखर, नवकार महामंत्र जप से गुंजायमान हुआ वातावरण-वरुण मुनि
राष्ट्रीय संत उपप्रवर्तक परम पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज, भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज एवं मुनिरत्न श्री रूपेश मुनि जी महाराज के पावन मंगल प्रवास से सम्पूर्ण राजाजीनगर क्षेत्र धर्म, भक्ति और साधना के उज्ज्वल आलोक से आलोकित हो उठा। पूज्य गुरु भगवंतों के आगमन से वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा, श्रद्धा और पवित्रता का अनूठा संचार हुआ।
दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। नगरवासी, श्रावक-श्राविकाएं तथा दूर-दूर से आए धर्मानुरागी श्रद्धालु पूज्य गुरु भगवंतों के दर्शन व आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु उत्साहित भाव से उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं के चेहरे पर गुरु सान्निध्य का उल्लास और हृदयों में आत्मिक आनंद की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही थी।
राजाजीनगर श्री संघ के महामंत्री श्री नेमीचंद जी दलाल ने जानकारी देते हुए बताया कि पूज्य गुरु भगवंतों का मंगल प्रवास रविवार तक जैन स्थानक, राजाजीनगर में रहेगा। प्रवास अवधि में गुरु भगवंतों के दर्शन, प्रवचन एवं स्वाध्याय से क्षेत्र के श्रद्धालुजन धर्मानंद में निमग्न रहे। आज 13 नवंबर को गुरु अमर मुनि जी की पुण्य स्मृति के पावन अवसर पर परम गुरुभक्त श्री अमरचंद जी गांधी जी के निवास स्थान पर प्रातः 6:05 बजे से 11:20 बजे तक सवा पाँच घंटे का नवकार महामंत्र अखंड जाप अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति भाव से संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर जाप में सहभागी बने और आत्मशुद्धि एवं पुण्य लाभ का संचय किया। संपूर्ण वातावरण नवकार महामंत्र की पवित्र ध्वनियों से गूंज उठा, जिससे घर-घर में शांति, सुख और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। इस अवसर पर उपप्रवर्तिनी महाश्रमणी श्री निर्मला जी म. सा. की शुभ निश्रा का लाभ श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। उनके सान्निध्य से कार्यक्रम की पवित्रता और भी बढ़ गई।
संघ के अध्यक्ष श्री प्रकाशचंद जी चाणोदिया एवं उपाध्यक्ष श्री रोशन लाल जी ने बताया कि 16 नवंबर को पूज्य गुरु भगवंतों के पावन सानिध्य में विशेष प्रवचन सभा का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर चतुर्विध संघ का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, जिसमें धर्म, सेवा और साधना की धारा एक साथ प्रवाहित होगी।राजाजीनगर श्री संघ धर्म, सेवा और साधना की प्रेरणा से निरंतर गतिमान है। पूज्य गुरु भगवंतों के आगमन से सम्पूर्ण संघ में अपार श्रद्धा, भक्ति और आनंद की अनुभूति हुई। गुरु चरणों में समर्पित राजाजीनगर का यह प्रवास क्षेत्र के इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय के रूप में अंकित हो गया।