आज गुरुभगवंत ने दो घडी – 48 मिनट, का सामायिक वृत समझाते हुए बहुत गूढ बात बताई ।
सामायिक करने वाला, दो घडी के लिए समस्त पाप-क्रियाओं का परित्याग कर देता है । सामायिक मन को स्थिर रखने की अपूर्व क्रिया है । आत्मिक शांति प्राप्त करने का संकल्प है, परम पद प्राप्त करने का सरल और सुखद मार्ग है, अखंडानंद प्राप्त करने का गुप्त मंत्र है, दुःख समुद्र से तैरने का श्रेष्ठ जहाज है तथा अनेक कर्मों से मलिन हुई आत्मा को परमात्मा बनाने की सामर्थ्य से परिपूर्ण है ।
प्रतिदिन दो घडी के लिए अपने अंतस को संग्रहित कर दिव्य ज्योति पाने का लक्ष रखें । सिर्फ 48 मिनट ईश्वर भजन ओर अंतर्मन को आराधना में लीन कर अनंत उर्जा का संचार कर सकते हैं ।
सभी को सादर जय जिनेन्द्र ।