मद्रास विश्वविद्यालय के जैनोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित “जैन धर्म की महिमा एवं आधुनिक संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता: नवीन आयाम” विषयक दो दिवसीय संगोष्ठी (23–24 मार्च 2026) का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह संगोष्ठी Research Foundation for Jainology तथा Jain Academy of Scholars, अहमदाबाद के सहयोग से आयोजित की गई।
23 मार्च को आयोजित उद्घाटन सत्र में डॉ. रीटा जॉन, रजिस्ट्रार, मद्रास विश्वविद्यालय द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर देवकुमार सर एवं जयंतिलाल सर सहित लगभग 50 विद्वानों (स्कॉलर्स) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
संगोष्ठी के विभिन्न शैक्षणिक सत्रों में देश भर से आए विद्वानों द्वारा अनेक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें जैन दर्शन की समकालीन प्रासंगिकता पर गहन विचार-विमर्श हुआ। संपूर्ण कार्यक्रम का लाइव-स्ट्रीमिंग “जय भारत, जय जिनशासन” यूट्यूब चैनल पर किया गया, जिससे इसे व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुँच मिली और अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई।
24 मार्च को आयोजित समापन (वैलेडिक्टरी) सत्र में डॉ. नंदिता कृष्णन तथा कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने संगोष्ठी की सराहना करते हुए जैन अध्ययन के क्षेत्र में ऐसे आयोजनों की निरंतर आवश्यकता पर बल दिया।
संगोष्ठी के उपरांत 25 एवं 26 मार्च को प्रतिभागियों के लिए दो दिवसीय हेरिटेज ट्रिप का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही, 27 मार्च को ऑनलाइन सत्र आयोजित होंगे, जिनमें लगभग 15 शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे और देश-विदेश के अनेक विद्वान इसमें सहभागिता करेंगे।
यह संगोष्ठी जैनोलॉजी विभाग की उस सतत प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके माध्यम से जैन दर्शन को आधुनिक संदर्भ में एक जीवंत एवं प्रासंगिक अध्ययन क्षेत्र के रूप में स्थापित किया जा रहा है। मद्रास विश्वविद्यालय के जैन विभाग की अध्यक्ष तथा संगोष्ठी की संचालिका डॉ प्रियदर्शना जैन ने यह जानकारी प्रस्तुत करते हुए कहा कि जैन धर्म के सिद्धांत, आध्यात्मिक तथा भौतिक दोनों जगत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।









