पुण्य नगरी पुणे के पावन प्रांगण में आज दो आध्यात्मिक धाराओं का अत्यंत मधुर एवं प्रेरणादायक मिलन हुआ। आचार्य भगवन परम पूज्य श्री कुंथू सागर जी महाराज एवं भारत गौरव पूज्य डॉ. श्री वरुण मुनि जी महाराज साहब का स्नेहपूर्ण सानिध्य प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर आचार्य श्री कुंथू सागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम भले ही श्वेतांबर हों या दिगंबर, परंतु मूल रूप से हम सभी एक ही हैं। मुनि श्री का यह आगमन जैन एकता का सशक्त संदेश देता है और समाज को एक सूत्र में पिरोने की प्रेरणा प्रदान करता है।
भारत गौरव पूज्य डॉ. वरुण मुनि जी महाराज साहब ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दिगंबर परंपरा के आचार्य श्री साधना की परम प्रकाष्ठा के साक्षात प्रतीक हैं। वे एक उच्च कोटि के आध्यात्मिक योगी एवं साधना के शिखर पुरुष हैं।
इस पावन अवसर पर श्रुताचार्य, साहित्य सम्राट पूज्य प्रवर्तक श्री अमर मुनि जी महाराज द्वारा संपादित सचित्र “श्री उत्तराध्ययन सूत्र” की भेंट भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज एवं कर्मयोगी मुनिरत्न श्री रुपेश मुनि जी महाराज द्वारा आचार्य श्री को समर्पित की गई।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ सभी संतों का भावपूर्ण अभिनंदन किया तथा इस ऐतिहासिक मिलन को जैन एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।



