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जिन शासन की प्रभावना का अद्वितीय कीर्तिमान स्थापित करने वाला “अभय प्रभावना” एक अनुपम एवं प्रेरणादायक केंद्र है

जिन शासन की प्रभावना का अद्वितीय कीर्तिमान स्थापित करने वाला “अभय प्रभावना” एक अनुपम एवं प्रेरणादायक केंद्र है

राष्ट्र संत श्रमण संघीय उप-प्रवर्तक परम पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज साहब, भारत गौरव परम पूज्य डॉ. श्री वरुण मुनि जी महाराज साहब एवं मुनिरत्न कर्मयोगी श्री रुपेश मुनि जी महाराज साहब का पुणे से विहार करते हुए अभय प्रभावना तीर्थ में मंगलमय पदार्पण हुआ।

इस दिव्य संस्थान की स्थापना प्रसिद्ध उद्योगपति, समाज रत्न एवं दानवीर भामाशाह श्री अभय जी फिरोदिया द्वारा की गई है। यह केंद्र अपने आप में जैन धर्म का एक जीवंत एवं आधुनिक स्वरूप प्रस्तुत करता है, जहाँ भगवान महावीर की शिक्षाओं एवं सिद्धांतों को अत्यंत आकर्षक और प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया है।

यहाँ दिगंबर, श्वेतांबर, मूर्तिपूजक, स्थानकवासी एवं तेरापंथ—चारों धाराओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। आत्मा, परमात्मा, कर्म, पुनर्जन्म, संस्कृति, इतिहास एवं जीवन के अनेक गूढ़ विषयों को आधुनिक ऑडियो-वीडियो तकनीक एवं आर्ट गैलरी के माध्यम से सहज रूप में प्रस्तुत किया गया है।

आज की युवा पीढ़ी, बच्चे एवं बुजुर्ग—सभी इस स्थान के माध्यम से जैन धर्म के सिद्धांतों को सरलता से समझ सकते हैं। केवल जैन धर्म ही नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय एवं प्रत्येक मानव को अपने जीवन में कम से कम एक बार इस पावन स्थल के दर्शन अवश्य करने चाहिए, जिससे नैतिक एवं जीवन मूल्यों की गहन समझ सहजता से प्राप्त होती है।

वास्तव में, यदि इसे जैन धर्म का “एन्साइक्लोपीडिया” कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

श्री अभय जी फिरोदिया की सुपुत्री, नारी रत्न बहन सुनंदा फिरोदिया भी इस संस्थान के संचालन में अत्यंत परिश्रम एवं कुशलता के साथ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

इस केंद्र की विशेषता यह है कि यहाँ 24 तीर्थंकर भगवानों के जीवन, उनके समवसरण एवं उनसे जुड़ी प्रेरणादायक घटनाओं का अत्यंत अद्भुत एवं जीवंत प्रस्तुतीकरण किया गया है, जो अपने आप में एक अनोखा कीर्तिमान है।

सामान्यतः व्यक्ति अपने लिए घर, दुकान या भवन बनाता है, किंतु जिन शासन की प्रभावना के लिए इस प्रकार का दिव्य कार्य करना अत्यंत सराहनीय एवं प्रेरणादायक है। इसके लिए समस्त जैन समाज को उनका अभिनंदन करना चाहिए।

पूज्य संतों का 2025 का बेंगलुरु चातुर्मास ऐतिहासिक रूप से सम्पन्न हुआ। तत्पश्चात हंपी, बदामी, गोवा एवं कोल्हापुर होते हुए पुणे पदार्पण हुआ और वहाँ से अभय प्रभावना में आगमन हुआ। इस दिव्य परिसर को देखकर सभी के मन में अत्यंत प्रसन्नता एवं श्रद्धा का भाव जागृत हुआ।

इस अवसर पर तपस्विनी मीरा बाई जी लुनिया, बहन अनीता जी भंडारी, बहन सुरेखा जी छाजेड़ सहित अनेक गुरु भक्त भी साथ में उपस्थित रहे।

यहाँ का विनम्र एवं संस्कारवान स्टाफ, सात्विक भोजन, सुंदर आवास व्यवस्था तथा प्रकृति की गोद में स्थित यह केंद्र वास्तव में अद्भुत एवं प्रेरणादायक है। आने वाले समय में यह संस्थान निश्चित रूप से एक प्रकाश स्तंभ बनकर मानवता को नई दिशा प्रदान करेगा।

अतः प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में एक बार इस पावन स्थल के दर्शन अवश्य करने चाहिए।
पूज्य गुरुदेवों ने भी श्री अभय जी फिरोदिया द्वारा किए जा रहे इस महान सेवा कार्य एवं जिन शासन की प्रभावना हेतु उन्हें हृदय से साधुवाद एवं मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।

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