श्रद्धा और भावों से ओतप्रोत गुरु भगवंतों की विहार यात्रा
गुरु भगवंतों का विहार राजाजीनगर की ओर — भावभरी विदाई के बीच गूंजे श्रद्धा और भक्ति के स्वर
राष्ट्रीय संत उप प्रवर्तक पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज, भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज एवं मुनिरत्न रूपेश मुनि जी महाराज का पावन विहार आज दोपहर 3:00 बजे गांधीनगर से प्रारंभ होकर राजाजीनगर की ओर होगा। इस संबंध में जानकारी देते हुए संघ प्रमुख श्री राजेश जी मेहता ने बताया कि पूज्य गुरु भगवंतों के पावन सान्निध्य में अत्यंत भावपूर्ण ढंग से विदाई समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में अनेक गुरुभक्तों ने भजन, स्तुति एवं अपने भावों के माध्यम से गुरु चरणों में श्रद्धा पुष्प अर्पित किए और पूज्य गुरुदेव की मंगल यात्रा के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
मुनिरत्न श्री रूपेश मुनि जी महाराज ने बताया कि मंगलवार को दोपहर 2:15 पर मंगलकारी विशेष जाप किए जाएंगे, तत्पश्चात उप प्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी महाराज अपने श्रीमुख से मंगल पाठ फरमाएंगे। ठीक 3:00 बजे गुरु भगवंतों की विहार यात्रा प्रारंभ होगी, जो नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए राजाजीनगर स्थित गुरुभक्त श्री उगमराज जी लुणावत के निवास स्थान पर पहुंचेगी। वहां धर्मसभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 3:31 से 4:00 बजे तक विशेष जप अनुष्ठान संपन्न होगा।
तत्पश्चात श्री कमलकुमार जी, संतोषकुमार जी एवं शीतलकुमार जी लुणावत परिवार की ओर से आए हुए सभी गुरुभक्तों के लिए विशेष प्रभावना कार्यक्रम रखा जाएगा।
अपने उद्बोधन में भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज ने कहा कि—“पिछले चार महीनों में यहां के सभी श्रावक-श्राविकाओं ने तन, मन और धन से सेवा कर इस चातुर्मास को सफल बनाया है। आपकी सेवाएं और श्रद्धा-भक्ति यूं ही बढ़ती रहें, यही हमारी मंगल कामना है। जनकल्याण के कार्यों में आप सब आगे बढ़ें, यही वास्तविक साधना है।” इस अवसर पर आठ उपवास, नौ उपवास, तीन उपवास एवं वार्षिक तप करने वाले भाई-बहनों का रजत मुद्रा एवं शाल-माला के साथ विशेष बहुमान किया गया। साथ ही, प्रतिभाशाली बच्चों का श्रीसंघ द्वारा अभिनंदन कर उन्हें संघ के उज्जवल सितारों के रूप में सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में यशवंतपुर, श्रीरामपुरम, राजाजीनगर, चिकपेट आदि स्थानों से बड़ी संख्या में गुरुभक्त उपस्थित रहे। मुख्य अतिथियों में श्री तेजराज जी ओस्तवाल, श्री मदनलाल जी दलाल, श्री संपतलाल जी ढीलीवाल, श्री सुरेंद्र जी आंचलिया, श्री देवेंद्र जी शर्मा एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
चातुर्मास के समापन अवसर पर डॉ. वरुण मुनि जी महाराज ने अपने विदाई संदेश में कहा —“जो भी संत पधारें, उनकी सेवा का लाभ अवश्य लें। किसी भी संप्रदाय के संत-साध्वी आएं, बिना भेदभाव के उनका सत्संग सुनें और उनके उपदेशों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें।” सभी श्रद्धालु गुरुभक्तों ने नम आंखों और अश्रुपूरित नेत्रों से पूज्य गुरु भगवंतों की मंगल यात्रा के लिए अपनी शुभकामनाओं के भावपूर्ण श्रद्धा सुमन समर्पित किए।