सौभाग्य जगाने वाले हैं – श्री गौतम स्वामी जी
श्री गुजराती जैन संघ, गांधीनगर में चातुर्मास के अवसर पर विराजित भारत गौरव डॉ. श्री वरुण मुनि जी महाराज के सान्निध्य में आज गौतम प्रतिपदा एवं गोवर्धन पूजा के पावन अवसर पर एक भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया।
इसके उपरांत भारत गौरव डॉ. श्री वरुण मुनि जी महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचन में कहा कि —“गोवर्धन पूजा हमें यह संदेश देती है कि सच्चा धर्म प्रकृति, जीव-जंतु और मानव के बीच संतुलन बनाए रखना है। जब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाया, तब उन्होंने यह प्रेरणा दी कि ईश्वर-भक्ति केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों और पर्यावरण की रक्षा में भी निहित है। आज के युग में भी हमें अपने कर्मों के द्वारा गोवर्धन पूजा का सार समझना होगा — ‘सहयोग, संरक्षण और संतुलन’।”
मुनि श्री ने आगे कहा कि त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मिक उत्थान के साधन हैं। जब व्यक्ति धर्मभाव से पर्वों को मनाता है, तो जीवन में आनंद, शांति और करुणा के भाव स्वतः प्रकट होते हैं। जैन परंपरा के अनुसार आज के इस दिन को गौतम प्रतिपदा के नाम से भी जाना जाता है एक और जहां प्रभु महावीर ने दीपावली की रात्रि में महा निर्वाण को प्राप्त किया वहीं उनके प्रधान शिष्य श्री गौतम स्वामी जी महाराज ने केवल ज्ञान को प्राप्त किया आज के दिन श्री गौतम स्वामी जी महाराज का बड़ी श्रद्धा से जाप करते हैं इंद्राभूती गौतम स्वामी जी महाराज का पवन नाम साक्षात कामधेनु एवं चिंतामणि के समान सौभाग्य दायक है जो भी इनका जाप करते हैं उनके जीवन में सुख शांति समृद्धि सौभाग्य की अभिवृद्धि होती है इस अवसर पर जैन परंपरा के नव वर्ष का शुभारंभ हुआ व महामंगल पाठ का भी आयोजन हुआ। संघ प्रमुख श्री राजेश भाई मेहता ने धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ युवा मनीषी, मधुर गायक श्री रूपेश मुनि जी के प्रेरणादायक भजनों से हुआ। तत्पश्चात उपप्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी महाराज ने मंगल पाठ का वाचन कर उपस्थित श्रद्धालुओं को शुभाशीष प्रदान किया।