सेवा, श्रद्धा और समर्पण का अनंत प्रकाश
भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में आज समाज के समक्ष सेवा, समर्पण, विनम्रता और धर्म–उत्थान का अत्यंत प्रेरणादायी संदेश प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जब कोई परिवार धर्म के प्रति श्रद्धा, समाज के प्रति करुणा और मानवता के प्रति संवेदनशीलता से कार्य करता है, तब उसकी सेवा स्वयं इतिहास में स्वर्णाक्षरों से अंकित हो जाती है।
ऐसा ही अनुपम उदाहरण बेंगलुरु का सुराणा परिवार है, जिसने उद्योग, व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा और धार्मिक सेवा—सभी क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ी है। चेन्नई या हैदराबाद की ओर जाने वाले राजमार्ग पर स्थित जैन तीर्थ सुशील धाम अत्यंत शांत, सौम्य और दिव्य वातावरण से परिपूर्ण धार्मिक केंद्र है। यह धाम चिंतामणि भगवान पार्श्वनाथ तथा अनेक तीर्थंकर भगवंतों के भव्य मंदिरों से अलंकृत है। जिन शासन अधिष्ठायक देवी–देवताओं के अनेक दिव्य देवालय इस परिसर की आध्यात्मिक शोभा को और प्रखर बनाते हैं। यहीं परम पूज्य आचार्य श्री सुशील सुरीश्वर जी महाराजा का पावन समाधि–स्थल स्थित है, जहाँ प्रतिक्षण आध्यात्मिक ऊर्जा का स्पंदन अनुभव होता है।
धाम में नवरत्नों की स्फटिक से निर्मित मनोहारी मूर्तियों का अद्वितीय संग्रहालय, संत निवास, विशाल अतिथि–भवन तथा बारहों महीने संचालित रहने वाली भोजनशाला इसकी सेवा–परंपरा का सजीव प्रतीक है। देशभर के दिगंबर, श्वेतांबर मूर्तिपूजक, स्थानकवासीऔर तेरापंथी परंपराओं के सैकड़ों–हजारों संत–साध्वियाँ प्रतिवर्ष अपनी पदयात्राओं के मध्य यहाँ रहकर साधना और प्रवास करते हैं। इस विराट और भव्य धाम का निर्माण श्री दिलीप जी, श्री आनंद जी और सम्पूर्ण सुराणा परिवार की सेवा-साधना का परिणाम है।
भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज ने कहा कि सुराणा परिवार केवल उद्योग–जगत में अग्रणी नहीं, बल्कि उनके जीवन का आधार–स्तंभ “सेवा” है। सुराणा हॉस्पिटल, सुराणा स्कूल, सुराणा माइक्रो लैब, विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक योजनाएँ तथा भगवान महावीर हॉस्पिटल में निर्मित एक विशाल परिसर—ये सब उनकी सेवा–संस्कृति के उज्ज्वल साक्षी हैं। उनके प्रत्येक कार्य में समाज और धर्म के प्रति गहन संवेदना स्पष्ट दिखाई देती है। इसी धाम के समीप स्थित सुस्वानी माता मंदिर धाम भी सुराणा परिवार की आस्था और सेवा का भव्य प्रतीक है।
यहाँ देवी लक्ष्मी, पद्मावती माताजी, सुस्वानी माताजी, अंबा माताजी, सच्चियाय माता ( ओसिया जी ) के दिव्य मंदिर स्थापित हैं। सुन्दर शिव मंदिर और आकर्षक अतिथि–गृह भी इस पवित्र परिसर का अभिन्न हिस्सा हैं। यह स्थान सर्वधर्म समभाव की अद्भुत मिसाल है—जहाँ प्रतिदिन हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और जैन सहित सभी समुदायों के भक्त बड़ी संख्या में दर्शन, वंदन और पूजा–अर्चना के लिए पहुँचते हैं। गुरुदेव ने अपने उपदेश में कहा कि यहाँ उद्देश्य सुराणा परिवार की प्रशंसा करना नहीं है; उनका जीवन तो पहले से ही सेवा का जीवंत ग्रंथ है। हमारा अभिप्राय यह है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति प्रेरणा लेकर अपने माता–पिता के नाम से कोई सेवा–प्रकल्प अवश्य प्रारंभ करे, जिससे उनके नाम इतिहास में सदा उज्ज्वल रहें।
उन्होंने कहा कि न केवल सुराणा परिवार के सदस्य, बल्कि उनका सम्पूर्ण स्टाफ भी विनम्रता, मेहनत, श्रद्धा और सेवा की भावना से ओत-प्रोत है—जो किसी भी संस्था के लिए अत्यंत अनुकरणीय गुण हैं। समापन में राष्ट्र संत पंकज मुनि महाराज ने मंगल पाठ कर उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया। मुनिरत्न श्री रूपेश मुनि जी महाराज ने बताया कि पूज्य गुरु भगवंत शीघ्र ही सुशील धाम से हिलटॉप मार्बल फैक्ट्री, कामधेनु मार्बल फैक्ट्री, फतेह मार्बल फैक्ट्री तथा कृष्णागिरि में स्थित श्री पारस–पद्मावती धाम हेतु प्रस्थान करेंगे। वहाँ से वे तुमकुर मार्ग होते हुए हुबली एवं तत्पश्चात पुणे की ओर अपने प्रवास को आगे बढ़ाएंगे।