चेन्नई में साहुकारपेट के बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन में संघ समर्पण दिवस मनाया गया |
वरिष्ठ स्वाध्यायी आर वीरेन्द्रजी कांकरिया ने स्वाध्यायीगण को संबोधित करते हुए कहा कि सामायिक स्वाध्याय के प्रबल प्रेरक इतिहास मार्तण्ड बाल ब्रह्मचारी आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हस्तीमलजी म.सा की अनमोल कृति जैन धर्म का मौलिक इतिहास में वर्णित किया हैं कि भगवान महावीर स्वामी के छपनवें पट्टधर आचार्य श्री गजसेनजी महाराज के आचार्यकाल में जिनशासन के महान प्रभावक महादानी श्री जगड़ू शाह हुए | दानवीर सुश्रावक जगड़ू शाह ने विक्रम संवत 1315 से त्रिवार्षिक दुष्काल के समय देश भर में 112 भोजनशालाएँ खोलकर अकालग्रस्त जनसाधारण के लिए मानवता की मिसाल स्थापित करते हुए अभूतपूर्व सेवाएं की | प्रतिदिन प्रातःकाल पर्दे के पीछे रहकर दान लेने वाले का मुंह देखे बिना वे मुक्त हाथों से दान देते थे |
राजा गुर्जरराज बीसलदेव उनकी दान देने की परीक्षा लेने गए,पर्दे के पीछे उन्होंने अपनी हथेली रखी तो जगड़ू शाह ने उनकी हस्तरेखाओं के लक्षण को देखकर राजा हैं मजबूरी से आये हैं ,समझ कर अपने हाथ की बहुमूल्य रत्नजड़ित स्वर्ण मुद्रिका रख दी राजा ने दूसरी हथेली रखी तो अपनी हीरक मुद्रिका भी दे दी | राजा ने सम्मानपूर्वक जगड़ू शाह को राजदरबार में स्वागत करते हुए उचित सम्मान स्थान दिया, अपनी दानवृति के लिए उनका नाम इतिहास में अमर हो गया |
श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के निवर्तमान कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने बताया कि जिनशासन में संघ समर्पण दिवस का सर्वाधिक महत्व हैं,श्रावक श्राविकाओं को संघ समर्पण के संकल्प को लेकर सेवा में आगे राहना चाहिए |
संघ समर्पण संकल्प दिवस पर इंदरचंदजी कर्णावट, पदमचंदजी श्रीश्रीमाल रुपराजजी सेठिया महावीरचन्दजी बागमार, वीरेन्द्रजी ओस्तवाल नवरतनमलजी चोरडिया योगेशजी श्रीश्रीमाल लीलमचन्दजी बागमार उच्छबराजजी गांग आदि स्वाध्यायीगण की उपस्थिति प्रमोदजन्य रही | जैन संकल्प प्रत्याख्यान मांगलिक महापुरुषों आचार्य भगवन्तों उपाध्याय भगवन्त भावी आचार्यश्री साध्वी प्रमुखा गुरु भगवन्तों की जयजयकार संग संघ समर्पण संकल्प दिवस के रुप में संपन्न हुआ |