स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट में भगवान महावीर स्वामी का 2625 वां जन्म कल्याणक सामायिक दिवस के रुप में मनाया
चेन्नई : साहूकारपेट के बेसिन वाटर वर्क्स में स्थित स्वाध्याय भवन में भगवान महावीर स्वामी का 2625 वां जन्म कल्याणक सामायिक दिवस के रुप में मनाया गया | पुनीत पावन प्रसंग पर उपस्थित स्वाध्यायीगण श्री योगेशजी श्रीश्रीमाल,वीरपिता-वीर पति बाबू धनपतराजजी सुराणा, इंदरचंदजी कर्णावट,आर नरेन्द्रजी कांकरिया, गौतमचन्दजी मुणोत,जे कमलजी चोरडिया,श्री जैन रत्न युवक परिषद् तमिलनाडु के शाखा प्रमुख सन्दीपजी ओस्तवाल, महावीरचन्दजी बागमार,लीलमचन्दजी बागमार,उच्छबराजजी गांग श्री जैन रत्न श्राविका मण्डल तमिलनाडु की अध्यक्षा शशिजी कांकरिया सुबीताजी सोनलजी सुराणा ने दो-दो सामायिक की साधना करते हुए सामूहिक रुप से वीर स्तुति,महावीर चालीसा, हीरा चालीसा का गान किया |
वरिष्ठ स्वाध्यायी आर वीरेन्द्रजी कांकरिया ने प्रभु महावीर के जीवन चारित्र का ह्रदय स्पर्शी विवेचन करते हुए बताया कि प्रभु महावीर के तीर्थंकर बनने के बाद देवताओं द्वारा समोवशरण की स्थापना के पश्चात व निर्वाण के पूर्व उपदेश विपाक सूत्र व उतराध्ययन सूत्र के रुप में उपलब्ध हैं,सभी को इनका वांचन करना चाहिए | प्रभु महावीर ने कर्म निर्जरा के लिए अनार्य क्षेत्र में विचरण किया व परीषहों को समता पूर्वक सहन किया व किसी को दोष नहीं दिया | उन्हें शिष्य गणधर गौतमस्वामी पर भी राग नहीं था तो उन पर तेजो लेश्या फेंकने वाले गौशालक पर भी द्वेष नही था | उनके हृदय में प्राणी मात्र के प्रति करुणा थी |
श्री जैन रत्न श्रावक संघ तमिलनाडु के पूर्व कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने बताया कि प्रभु महावीर के जन्म कल्याणक के प्रसंग पर वर्ष भर में प्रभु महावीर की अन्तिम वाणी उतराध्ययन सूत्र के वांचन करने का सामूहिक संकल्प किया गया व उपस्थित श्रावक- श्राविकाओं ने विश्व में युद्ध के कारण हो रही हिंसा का तांडव रुके,सम्पूर्ण विश्व में शांति हो, इसलिए सामूहिक रुप से पन्द्रह मिनट नवकार मन्त्र का जाप किया । दैनिक चिन्तन, जैन संकल्प पाठ, सामूहिक नियम,व्रत- प्रत्याख्यान गुरु सुखसाता पृच्छा पाठ व मांगलिक के साथ प्रभु महावीर जन्म कल्याणक सामायिक दिवस के रुप में सम्पन्न हुआ |