धर्म समाज के उत्थान और शुद्धता की रक्षा के लिए समय-समय पर महान आत्माएँ अवतरित होती हैं, जो धर्म को उसके मूल स्वरूप में पुनः प्रतिष्ठित करती हैं। ऐसे ही प्रेरक विचार भारत गौरव डॉ. श्री वरुण मुनि जी महाराज ने गांधीनगर, बेंगलुरु में अपने प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं के समक्ष व्यक्त किए।मुनि श्री ने कहा — “कोई भी धर्म परंपरा जब प्रारंभ होती है, तो वह गंगोत्री के समान निर्मल और पवित्र होती है, परंतु काल, क्षेत्र और परिस्थितियों के प्रभाव से उसमें कुछ विकार आ जाते हैं।
तब समाज में सुधार का कार्य धर्म के उद्धारक महापुरुष करते हैं।”उन्होंने आगे कहा कि स्थानकवासी परंपरा के प्रवर्तक धर्म प्राण वीर लोंकाशाह ऐसे ही एक महान समाज सुधारक और धर्म उद्धारक थे, जिन्होंने धर्म को उसकी मौलिक शुद्धता में स्थापित किया। जब कालचक्र के प्रभाव से धर्म में कुरीतियों का प्रवेश हुआ, तब लोंकाशाह जी ने धर्म के सत्य स्वरूप को पुनः प्रकाशित किया।
मुनि श्री ने बताया कि धर्म प्राण वीर लोंकाशाह जी के साथ 45 श्रीसंघों के अध्यक्षों ने भी धर्म की दीक्षा ग्रहण की और पारिवारिक जीवन का त्याग कर साधु जीवन अपनाया। समय बीतने के साथ उनके शिष्यों के 22 समूह बने, जो “22 टोला” के नाम से प्रसिद्ध हुए। इन संतों ने पूरे भारत में भ्रमण कर धर्म प्रचार और मानवता के दीप को प्रज्वलित किया।
मुनि श्री ने आगे कहा कि इसी श्रृंखला में अनेक महान संतों ने धर्म की सेवा में अपना जीवन अर्पित किया। उनमें प्रमुख थे – महान संत जैन दिवाकर श्री चौथमल जी म. सा., जिन्होंने गरीबों की झोपड़ी से लेकर राजमहलों तक धर्म का संदेश पहुँचाया। उन्होंने केवल प्रवचन ही नहीं दिए, बल्कि अपने जीवन में उन शिक्षाओं का आचरण कर समाज में आदर्श प्रस्तुत किया। उनके प्रवचनों से समाज की अनेक कुरीतियाँ मिटीं और लोगों में नई चेतना का संचार हुआ।
कर्नाटक के घोर तपस्वी परम पूज्य श्री गणेशलाल जी महाराज का जीवन भी अत्यंत प्रेरणादायी रहा। उन्होंने सदैव खादी के वस्त्र धारण कर देशभक्ति का संदेश दिया और धर्म के नाम पर होने वाली पशु बलि जैसी कुप्रथा को अनेक स्थानों पर बंद करवाया। उनके उपदेशों से प्रेरित होकर आज उनके नाम से लगभग 350 गौशालाएँ भारतभर में संचालित हो रही हैं — जो उनके जीवन की जीवंत प्रेरणा का प्रतीक हैं।
मुनि श्री ने कहा — “ऐसे महापुरुष केवल धर्म के प्रचारक नहीं, बल्कि धर्म के प्राणदाता होते हैं। उनका जीवन सिखाता है कि धर्म आचरण में है, प्रदर्शन में नहीं। ”इन तीनों ही पूज्य महापुरुषों — धर्म प्राण वीर लोंकाशाह, श्री चौथमल जी म. सा. और श्री गणेशलाल जी म. सा. — की पावन जन्म जयंती 9 नवम्बर, रविवार को प्रातः 9:30 से 11:30 बजे तक सामायिक दिवस एवं गुणगान सभा के रूप में मनाई जाएगी। यह कार्यक्रम पूज्य उपप्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित होगा। श्रीसंघ के अध्यक्ष राजेश मेहता ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे इस अवसर पर गुरु दर्शन एवं वाणी का श्रवण कर अपने जीवन को धन्य बनाएं।