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जैन श्वेतांबर तेरापंथ समाज के पर्युषण कल से

महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी के विद्वान सुशिष्य मुनि श्री रमेश कुमार जी एवं सहवर्ती मुनि सुबोध कुमार जी के पावन सान्निध्य में जैन श्वेतांबर तेरापंथ समाज के पर्यूषण पर्व की आराधना ट्रिप्लीकेन स्थित तेरापंथ भवन में तप- जप त्यागमय वातावरण में आगम स्वाध्याय आदि से उत्साह पूर्वक दिनांक 27 अगस्त मंगलवार से 4 सितंबर बुधवार तक की जाएगी। जैन श्वेतांबर तेरापंथी ट्रस्ट ट्रिप्लीकेन के मैनेजिंग ट्रस्टी गौतम सेठिया ने पर्युषण पर्व की जानकारी देते हुए कहा – पर्यूषण पर्व पर प्रातः 5:40 बजे सामूहिक भक्तामर पाठ, अणुव्रत प्रार्थना, वृहदमंगल पाठ होगा । प्रात 9:15 से पर्युषण पर्व के निर्धारित दिवस पर मुनि द्वय के प्रेरणादाई प्रवचन होंगे । दोपहर में आगम स्वाध्याय और जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम रहेगा । सायं 6:15 बजे गुरु वंदना सामूहिक प्रतिक्रमण के पश्चात 8:30 बजे अर्हत् वंदना एवं पूर्व निर्धारित रात...

सुख-दुख अपने कर्मों का फल: आचार्य मुक्तिप्रभ सूरी

चेन्नई. रायपुरम स्थित सुमतिनाथ जैन भवन में विराजित आचार्य मुक्तिप्रभ सूरी के सान्निध्य में सोमवार को प्रतिक्रमण पुस्तक का विमोचन हुआ। इस मौके पर आचार्य विनीतप्रभ सूरी ने कहा स्वर्ग और नरक दोनों इसी धरती की दो दिशाएं हैं-एक ऊपर की और दूसरी नीचे की। एक उत्थान की तो दूसरी पतन की। एक में सुख मिलता है तो दूसरी में दुख। एक में उपहार मिलता है तो दूसरे में मार। एक पुण्य से तो दूसरा पाप से मिलती है। पुण्य फल स्वर्ग में जाकर भोगा जाता है तो पाप का फल नरक में जाकर भोगना पड़ता है। मजे की बात यह है कि स्वर्ग और नरक गति जीव को अपने शुभाशुभ कर्मों के कारण मिलती है। विडम्बना है कि पाप करता है मानव और दोषी ठहराता है भगवान को। पहले तो यह तय करना होगा सुख और दुख की वजह क्या है। वजह पता चले बिना हमें सुख-दुख का समाधान कैसे हो सकता है। हम यहां केवल सुख व दुख का अंदाजा ही लगाते हैं। विदुर नीति में कहा गया है कि...

जहां संयोग का सुख, वहीं वियोग का दुख: साध्वी कंचनकंवर

चेन्नई. पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम में विराजित साध्वी कंचनकंवर ने कहा महापुरुष हमें जिनवाणी सुनाते हैं, हर बात समझाते हैं लेकिन समझते नहीं है। अपनी मोहनिद्रा से जागें, 18 पापस्थानों को छोड़ मिथ्यात्व के अंधकार से सम्यकत्व की रोशनी में आओ। पर्यूषण दस्तक दे रहा है, जाग्रत कर रहा है। जो प्रमाद के साथ सोता है वह आत्मरूपी मार्ग खो देता है। आश्रव का घर बंद कर संवर के घर के घर में आना है, नहीं तो क्रोध, मान, माया, रूपी लुटेरे आत्मारूपी धन को लूट लेंगे। अनन्त पुण्यों से दुर्लभ मानव जन्म मिला है इसे प्रमाद में न गंवाएं। सभी सांसारिक सुख भी दुखों से मिश्रित हैं। चक्रवर्ती के सुख में भी नरक के दुख का सागर लहरा रहा है। जहां जन्म, वहीं मृत्यु की चिंगारी है। जहां संयोग का सुख है, वहीं वियोग का दुख है। साध्वी डॉ. इमितप्रभा ने कहा आत्मा के साथ अनादि काल से चार प्रकार की इच्छाएं रहती हंै, इन्हें जीव जन्म से...

पर्युषण पर्व आत्मा की शुद्धि के लिए: साध्वी सुमित्रा

चेन्नई. कोडमबाक्कम-वड़पलनी जैन भवन में विराजित साध्वी सुमित्रा ने कहा मनुष्य के जागने का समय आ गया है। वर्तमान में लोग बाहर से तो जाग रहे हैं लेकिन अंतरात्मा से नहीं जाग रहे। यही कारण है कि धर्म के कार्य करने के बाद भी साफलता नही मिल रही है। अनंत काल से मोह माया के अंदर मनुष्य ने बहुत समय गवाया है पर अब जाग कर बचे हुए समय को परमार्थ में लगा देना चाहिए। पर्यूषण आ गया है अब मन के मैल को साफ करने का प्रयास शुरू कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोई हुई आत्मा को जगाने के लिए यह पर्व आता है जो मानव आत्मा को जगा लेगा उसका कल्याण हो जाएगा। जो नही जगा पाएगा उसका समय आगे भी व्यर्थ हो जाएगा। परमात्मा महावीर कहते हैं कि यह अवसर बहुत ही महान लोगों को मिलता है। अगर इस अवसर का लाभ ले लिया जाए तो जीवन के अंधकार में भटकना नहीं पड़ेगा। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो सुअवसर का इंतजार करते हैं और मौका मिलते ही उसका ला...

पर्युषण की आराधना कर समय को करें सार्थक: साध्वी सिद्धिसुधा

चेन्नई. साहुकारपेट स्थित जैन भवन में विराजित साध्वी सिद्धिसुधा ने कहा इस संसार का सबसे बड़ा दुख यह है कि संसार के रंग अंधा व्यक्ति नहीं देख सकता। यह उसकी मजबूरी है लेकिन उससे भी बड़ा दुख वह है कि आंखें होने के बाद भी मनुष्य दुनिया की खूबसूरती नहीं देख पा रहा है। मनुष्य अपने गलत कर्मो की वजह से मौत के करीब जा रहा है। सांसों की लड़ी टूटते ही सब खत्म हो जाएगा। दुनिया में जन्म लेकर आये हैं तो जीवन को सार्थक कर लो। साध्वी सुविधि ने कहा समय बहुत बलवान होता है अगर उसकी कीमत नही समझी तो अंत में पछतावा होगा। समय की रफ्तार को कोई रोक नहीं सकता, बस उसके साथ चला जा सकता है। वर्तमान में लोग समय की कीमत को नहीं समझ रहे है और इसे व्यर्थ कर रहे हैं लेकिन समय वापस लौट कर नहीं आता। पैसों से ज्यादा मूल्य समय का होता है इसलिए मनुष्य को समय का सही से उपयोग करना चाहिए। समय का दुरुपयोग करने वालों को कुछ हासिल नह...

जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि: जयधुरंधर मुनि

चेन्नई. वेपेरी स्थित जय वाटिका मरलेचा गार्डन में विराजित जयधुरंधर मुनि ने कहा व्यक्ति की जैसी दृष्टि होती है वैसी ही सृष्टि उसे नजर आती है। दृष्टिकोण सम्यक होने पर व्यक्ति को सभी में गुण ही नजर आते हैं और ऐसा गुण अनुरागी स्वयं भी गुणवान बन जाता है। हर इंसान में गुण और अवगुण दोनों ही मौजूद रहते हैं। छिद्रान्वेषी व्यक्ति चांद में दाग, गुलाब में कांटे, समुद्र में खारा पानी ही देखता है । दृष्टि दोष होने पर तो उपचार हो सकता है, मगर दोष दृष्टि होने पर किसी तरह का उपचार नहीं किया जा सकता। इसलिए साधक को स्वयं के ही स्वभाव में और सोच में परिवर्तन लाना चाहिए। इंसान को अपना स्वभाव मक्खी की तरह नहीं अपितु भंवरे की तरह बनाना होगा। मक्खी हमेशा गंदगी को ही ग्रहण करती है, जबकि एक भंवरा फूल से पराग को ग्रहण करता है । व्यक्ति का नित्य प्रतिदिन गुण ग्रहण करने का भाव रहना चाहिए और दोष पर दृष्टि नहीं जानी चाहि...

संसार में डिगाने व डिगने के अनेक साधन: साध्वी मुदितप्रभा

चेन्नई. किलपॉक स्थित कांकरिया भवन में साध्वी मुदितप्रभा ने कहा साधना के मार्ग में आगे बढऩे के बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखना है। संसार में डिगाने व डिगने के अनेक साधन हैं पर साधक व श्रावक को हमेशा मजबूत रहना है। जो मजबूत इरादों व लक्ष्य से आगे बढ़ते हैं उन्हें कोई डिगा नहीं सकता। जो साधक शरीर व आत्मा को अलग मान कर चलते हैं उन्हें संसार के कोई भी प्रलोभन कैसी भी परिस्थिति डिगा नहीं सकते। पर्वाधिराज पर्व के पावन दिवसों पर विश्राम नहीं करते हुए इंद्रियों के विषयों को विराम देना है। हमें इन पवित्र दिनों में प्रभु महावीर की आगम वाणी सुननी है। शास्त्र श्रवण कर अपनी आत्मा को निर्मल बनाना है, यथा शक्ति तप साधना आराधना करनी है। हमें संसार में भटकाने वाले साधनों के बीच नहीं अपितु साधना में जीना है। जो इंद्रियों को वश में कर लेते हैं और इंद्रियों की गुलामी नहीं करते हैं उन्हें हमेशा जीत मिलती है, वे विज...

जीवमात्र को सबसे प्रिय है अपना जीवन: आचार्य तीर्थभद्र सूरीश्वर

चेन्नई. किलपॉक में विराजित आचार्य तीर्थभद्र सूरीश्वर ने पर्यूषण पर्व की शुरुआत पर कहा हमारे कर्तव्य का बोध कराने के लिए और प्रमादवश सोई हुई आत्मा को जाग्रत करने के लिए पर्यूषण पर्व आया है। उन्होंने कहा पर्युषण में तीन कार्य करने योग्य है आत्मा को याद करना, आत्मा को साफ करना और आत्मा के नजदीक रहना। पर्युषण में श्रावक के पांच कर्तव्य है अमारि प्रवर्तन, साधर्मिकवात्सल्य, क्षमापना, अ_म तप और चैत्यपरिपाठी। अमारि का तात्पर्य है हिंसा का त्याग करना यानी अहिंसा। यह धर्म का मुख्य लक्षण है। उन्होंने कहा हिंसा दो प्रकार की होती है दूसरे जीवों की हिंसा और अपनी आत्मा की हिंसा। हमें आम जीवन में इन दोनों हिंसा से बचना चाहिए। हमारी ऐसी प्रवृत्ति है कि दूसरे जीवों की हिंसा होती या नहीं, आत्मा की हिंसा हो जाती है। हमारे हृदय में सभी जीवों को अभयदान देने की भावना होनी चाहिए। जीवमात्र को सबसे प्रिय चीज अपना ज...

सबको आनंद देने वाला पर्व है पर्यूषण: साध्वी साक्षीज्योति

चेन्नई. न्यू वाशरमैनपेट जैन स्थानक में विराजित साध्वी साक्षीज्योति ने कहा पर्यूषण आध्यात्मिक पर्व है। इसकी आराधना से आनंद का अनुभव होता है। इस महान शब्द से अमृत का झरना झरता है। इसे पीने से जीव के पाप नष्ट होते हैं और मन निर्मल व वाणी पवित्र होती है। जब कानों में इस मीठे शब्द की गंूज होती है तो आत्मा में एक अजीब सा आनंद का अनुभव होता है। लौकिक पर्व से तन-मन छिन धन का अपव्यय होता है जबकि आध्यात्मिक पव वी ही नहीं स्वयं तीर्थंकर भी इसकी साधना करते हैं। ऐसे में पर्यूषण महापर्व की जो भी श्रद्धा से साधना-आराधना करता है उसके जीवन में आनंद की बहार आ जाती है। संजय दुगड़ ने बताया कि मंगलवार से पर्यूषण महापर्व तप-त्याग एवं नवकार महामंत्र के जाप के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान सवेरे 6.15 बजे प्रार्थना के बाद सूत्र वाचन, 8.40 बजे प्रवचन, दोपहर में कल्प सूत्र एवं सायं प्रतिक्रमण होगा।

पर्यूषण पर्व में अधिकाधिक साधना-धर्मआराधना करें : डॉ. वसंतविजयजी म.सा.

इंदौर। राष्ट्रसंत डॉ. वसंतविजयजी म.सा. ने सोमवार को कहा कि जैन समाज का महत्वपूर्ण पर्व होता है पर्यूषण पर्व, जिसका जैन समाज में बहुत बड़ा महत्व है। आठ दिनों के आत्मचेतना के इस पर्व में अधिक से अधिक साधना-धर्मआराधना करनी चाहिए। श्री नगीन भाई कोठारी चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में हृींकारगिरी तीर्थ धाम में दिव्य भक्ति चातुर्मास के 44 वें दिन प्रवचन करते हुए डॉ. वसंतविजयजी म.सा. बोले कि हमेशा किसी से भी बात करते समय अपने विवेक और उपयोग का ध्यान रखते हुए बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे मन में किसी भी प्रकार या हर प्रकार के बुरे विचारों को इस पर्यूषणपर्व के दौरान समाप्त करने के लिए व्रत किया जाता है। मन में किसी भी प्रकार के बुरे विचार को नहीं आने दें ओर तो ओर लोभ, क्रोध भी नहीं करते हुए किसी के प्रति ईर्ष्या का भाव नहीं लाना चाहिये। बुरे विचारों का त्याग कर ही शांति के मार्ग की ओर अग...

पर्युषण पर्वाधिराज में आत्मकल्याण हो प्रयास: महातपस्वी महाश्रमण

जैन धर्म के महापर्व पर्युषण के नौ दिवसीय अनुष्ठान का आगाज 27 अगस्त से  कुम्बलगोडु, बेंगलुरु (कर्नाटक): जैन धर्म का सबसे बड़ा महापर्व पर्युषण। अध्यात्म की चेतना का जागरण करने का सुअवसर, मोक्ष मार्ग की विशेष आराधना का सुअवसर व मन की बुराइयों को मिटाकर सत्पथ पर आगे बढ़ने की विशेष प्रेरणा प्रदान करने वाले महापर्व पर्युषण के नवाह्निक अनुष्ठान के शुभारम्भ से पूर्व सोमवार को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के दीप्यमान महासूर्य, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने ‘महाश्रमण समवसरण’ में उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को विशेष पाथेय प्रदान करते हुए जहां साधु-साध्वियों को धर्माराधना, आगम स्वाध्याय, ध्यान आदि के लिए उत्प्रेरित किया तो श्रावक-श्राविकाओं को इस महापर्व का पूर्ण लाभ उठाने और अपनी आत्मकल्याण करने के लिए अभिप्रेरित किया। सोमवार को प्रातः के मुख्य मं...

मालानी दंपति पहुंचे मोकलसर, पर्युषण पर्व का दीपरोशन किया

बेंगलूरु। बेंगलूरु के बसवनगुडी स्थित दादावाड़ी ट्रस्ट के सहमंत्री एवं उदारमना व्यक्तित्व तेजराज मालानी दंपति ने सोमवार को बाड़मेर जिले के मोकलसर में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वीश्री कल्पलताश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा में नमन-वंदन किया। उन्होंने बतौर अतिथि यहां साध्वीवृंद की आज्ञा से दीप रोशन कर पर्वाधिराज पर्व पर्युषण की शुरुआत की। स्थानीय संघ द्वारा मालानी दंपति का सत्कार भी किया गया।

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