चेन्नई साहूकारपेट के बेसिन वाटर स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन में स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत वरिष्ठ स्वाध्यायी वीरेन्द्र कांकरिया ने संघ की मुख्य पत्रिका जिनवाणी के अप्रैल 2026 के अंक में प्रकाशित तत्व चिन्तक श्रदेय श्री प्रमोदमुनिजी म. सा के प्रवचन आत्म-परिणामों की विशुद्धि बढाएं पर स्वाध्याय अनुप्रेक्षा करते हुए कहा कि भगवन्त पूज्यश्री हीराचंद्र जी म. सा के आज्ञानुवर्ती तत्व चिन्तक श्रदेय श्री प्रमोदमुनिजी म.सा ने प्रवचन में फरमाया हैं कि परिणामे बन्धो परिणामे मोक्खो | आत्मा में चंचल परिणीति के तीन कारण हैं-मन,वचन और काया | अगर श्रवण करते हुए आपके भाव चढ़ रहे हैं तो मुमुक्षु भाव की परिणति कह सकते हैं | सेवा में तीन सूत्र हैं,जगत की सेवा,अपनी सेवा और प्रभु की सेवा | स्वाध्यायी बन्धुवर ने इन सूत्रों पर विस्तृत चर्चा की | कर्मबन्ध क् संबंध परिणामों की धारा पर निर्भर हैं | पुण्यवानी बढ़ाकर भाव विशुद्ध करें तो इन्द्रियों, बुद्धि और निज का ज्ञान समझ सकेंगे |
रविवारीय नैतिक व धार्मिक विंग्स टू फ्लाई शिविर के शिविरार्थी बालक हितेनजी कोठारी ने जीवन संकल्प सूत्र,वरिष्ठ स्वाध्यायी दीपकजी श्रीश्रीमाल ने तीन मनोरथ चिन्तन व युवा स्वाध्यायी योगेशजी श्रीश्रीमाल ने प्रत्याख्यान कराये | श्रावक संघ के उपाध्यक्ष स्वाध्यायी बन्धुवर श्री गौतमचन्दजी मुणोत ने गुरु सुखसाता पाठ से पृच्छा की | श्री इंदरचंदजी कर्णावट ने मंगल पाठ किया |
धर्मसभा में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के उपाध्यक्ष गौतमचन्दजी मुणोत,रुपराजजी सेठिया महावीरचन्दजी कर्णावट इंदरचंदजी कर्णावट,महावीरचन्द जी छाजेड़ नवरतनमलजी चोरडिया,कमलजी चोरडिया, वीरेन्द्रजी ओस्तवाल, पदमचन्दजी दीपकजी योगेशजी श्रीश्रीमाल, हितेनजी कोठारी,आर नरेन्द्रजी कांकरिया, लीलमचन्दजी बागमार, उच्छबराजजी गांग सहित अनेक श्रदालुओं की सामायिक परिवेश में प्रमोदजन्य उपस्थिति रही |
श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ से आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने स्वाध्याय सेवा प्रदान करने हेतु स्वाध्यायी बन्धुवर व स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम में पधारने हेतु उपस्थित स्वाध्यायीगण को साधुवाद ज्ञापित किया |
तीर्थंकरों, महापुरुषों, आचार्य भगवन्तो, उपाध्याय प्रवर, भावीआचार्यश्री, साध्वीप्रमुखा चरित्र आत्माओं की जयजयकार संग स्वाध्याय-अनुप्रेक्षा कार्यक्रम सुसंपन्न हुआ |