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राष्ट्र संत पूज्य श्री पंकज गुरुदेव का संयम दिवस श्रद्धापूर्वक संपन्न

राष्ट्र संत पूज्य श्री पंकज गुरुदेव का संयम दिवस श्रद्धापूर्वक संपन्न

*“सरलता, स्नेह और सद्भाव के जीवंत प्रतिमान राष्ट्र संत पूज्य श्री पंकज गुरुदेव का संयम दिवस श्रद्धापूर्वक संपन्न”*

राष्ट्र संत परम पूज्य श्री पंकज गुरुदेव का संयम दिवस श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। सरलता, स्नेह और सद्भाव के जीवंत प्रतिमान राष्ट्र संत श्री पंकज गुरुदेव तथा भारत गौरव डॉ. श्री वरुण मुनि महाराज गोवा में चल रहे आध्यात्मिक प्रवास के दौरान श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, मडगांव के जैन स्थानक में आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर भारत गौरव डॉ. श्री वरुण मुनि महाराज जी ने अपने उद्बोधन में फरमाया कि आज का दिन हम सभी के लिए अत्यंत सौभाग्यशाली है, क्योंकि हम राष्ट्र संत, परम पूज्य उपप्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी महाराज का संयम दिवस मना रहे हैं। आपका जन्म हरियाणा प्रांत के साढोरा ग्राम में एक अग्रवाल जैन परिवार में हुआ। लगभग 10–12 वर्ष की अल्पायु में ही आपको पूज्य गुरुदेव श्रुताचार्य श्री अमर मुनि जी महाराज के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ और तभी आपका मन अनायास ही सांसारिक जीवन से साधना की ओर मुड़ गया।

कई वर्षों तक आपने गुरुदेव के श्रीचरणों में रहकर विद्या-अध्ययन किया। दिनांक 15 जनवरी 1984 को अशोक विहार, दिल्ली में आपने जैन भगवती दीक्षा ग्रहण कर संयम जीवन का वरण किया। दीक्षा ग्रहण करते ही आपने गुरु सेवा को अपने जीवन का प्रमुख अंग बना लिया। गुरु सेवा के साथ-साथ आप बीमार संतों, वृद्ध संतों तथा नवदीक्षित संतों की सेवा में सदैव तत्पर रहे हैं। लगभग 42 वर्षों से निरंतर सेवा करते हुए आप अपने पुण्य को बढ़ा रहे हैं।

सेवा के साथ-साथ सरलता आपके जीवन का विशेष गुण है। बच्चों के साथ आप बच्चों जैसे सरल, युवाओं के साथ ऊर्जावान और वृद्धों के साथ अनुभवपूर्ण दिखाई देते हैं। अमीर हो या गरीब, आप बिना किसी भेदभाव के सभी से समान स्नेह से मिलते हैं, दर्शन देते हैं और मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हैं। सभी के सुख-दुख का ध्यान रखते हुए उनकी समस्याओं को प्रेमपूर्वक सुनते हैं और सरल, सहज उपाय बताते हैं—जैसे प्रभु भक्ति करना और नवकार महामंत्र का जाप करना।

नवकार महामंत्र के प्रति आपकी गहन श्रद्धा है। आप प्रतिदिन अत्यंत तन्मयता से नवकार महामंत्र का जप, ध्यान, आराधना और साधना करते हैं। यह महामंत्र किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि गुणों और शक्तियों की उपासना का मंत्र है। नवकार आराधना के साथ-साथ आपके जीवन में स्नेह और सद्भाव का जो भाव दिखाई देता है, वह अद्भुत है। जो भी आपके दर्शन करने आता है, वह पहली ही भेंट में आपका हो जाता है। आपकी सादगी और सहजता सभी को सहज ही आकर्षित कर लेती है।

आप सदैव वर्तमान में जीने की प्रेरणा देते हैं। आज जहाँ अधिकांश लोग या तो भूतकाल के दुखों में उलझे रहते हैं या भविष्य की चिंताओं में, वहीं आप सदा अपनी मस्ती, भक्ति और साधना में लीन रहते हैं और सभी को वर्तमान में जीने का संदेश देते हैं।

आपको राष्ट्र संत भंडारी श्री पदमचंद्र जी महाराज, श्रुताचार्य आराध्य गुरुदेव श्री अमर मुनि जी महाराज, उपाध्याय प्रवर्तक श्रमण श्री फूलचंद जी महाराज, आचार्य श्री शिवमुनि जी महाराज, उपाध्याय श्री रविंद्र मुनि जी महाराज, उपाध्यक्ष श्री हेमचंद जी महाराज, पूज्य प्रवर्तक श्री सुमन मुनि जी महाराज सहित अनेक वरिष्ठ संतों की सेवा का लाभ प्राप्त हुआ है तथा उनका आशीर्वाद मिला है।

श्रुताचार्य श्री अमर मुनि जी महाराज के पश्चात वर्ष 2013 से आप गुरु परिवार का कुशलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं और माला के सूत्र की भांति सभी को जोड़कर धर्म परिवार को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। 42 वर्षों से आपकी संयम यात्रा लोकमंगल और लोककल्याण के लिए पूर्णतः समर्पित है। इस अवसर पर श्री संघ के महामंत्री श्री अनिल जी गोसालिया एवं श्रीमान प्रकाश जी गन्ना ने श्री संघ की ओर से पूज्य गुरुदेव को वंदन-अभिनंदन अर्पित किया। मुनिरत्न श्री रूपेश मुनि महाराज ने सामूहिक जाप कराकर अपनी शुभकामनाएँ अर्पित कीं। मडगांव श्री संघ के सभी सदस्यों ने इसे अपने संघ का परम सौभाग्य बताते हुए पूज्य गुरुदेव के चिरायु और शतायु जीवन की मंगल कामनाएँ कीं।

अंत में राष्ट्र संत पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज ने मंगल पाठ प्रदान कर सभी को अपना शुभ आशीर्वाद दिया।

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