जिनशासन गौरव, परमाराध्य आचार्य भगवन्त 1008 पूज्यश्री हीराचन्द्रजी म.सा महान अध्यवसायी सरस व्याख्यानी भावी आचार्य पूज्यश्री महेंद्रमुनिजी म.सा की आज्ञानुवर्तिनी व्याख्यात्री महासतीजी श्री सुमतिप्रभाजी म.सा की सुशिष्या श्री वर्षाजी म.सा ने सोमवार 8 दिसम्बर 2025 को बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट,साहूकारपेट में स्थित स्वाध्याय भवन में प्रवचन सभा में फरमाया कि आचार शुद्धि के लिए विचार शुद्धि आवश्यक हैं और विचार शुद्धि हेतु चार सूत्र प्रथम नाम की चाहना नहीं करना,द्वितीय सूत्र सहना पर कहना नहीं,तृतीय सूत्र कार्य करके गिनाना नही और चतुर्थ सूत्र त्याग करके अहंकार नहीं करना |
उपरोक्त सूत्रों पर विस्तृत प्रकाश करते हुए कहा कि दान देकर नाम व यश की कामना नहीं करें | वचनों को सहना और सहना आ गया तो समझो कि रहना आ गया | कोई भी कार्य हो सेवा सहयोग का उसको करते हुए गिनाना नहीं,अहसान भी जताना नहीं चाहिए | तप करके तपस्या का अहंकार नहीं करना चाहिए |
महासतीजी श्री तितिक्षाजी म. सा ने फरमाया कि मनुष्य भव क्यों मिला हैं,क्या कभी हमने इसका सम्यक चिन्तन किया | हमें मानव भव,भव भ्रमण को मिटाने के लिए मिला हैं | आत्मा की सुरक्षा के लिए प्राप्त मनुष्य भव में हम कितनी साधना कर रहे हैं,यह चिन्तन करें | जब तेरा समय था,तब तेरे पास समय नहीं था और जब तेरे पास समय हैं तब तेरा समय नहीं हैं |
महासतीजी ने तपस्या के प्रत्याख्यान व सामूहिक नियम कराने के पश्चात मांगलिक सुनाई | स्वाध्यायी बन्धुवर गौतमचन्दजी मुणोत ने गुरु सुखसाता पाठ से सामूहिक पृच्छा कराई व स्वाध्यायी बन्धुवर श्री कांतिलालजी तातेड़ ने जैन संकल्प करवाया | सभा का संचालन धार्मिक मास्टरजी श्री विनोदजी जैन ने किया |
श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ,तमिलनाडु के निवर्तमान कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने बताया कि दैनिक रुप से प्रवचन श्रृंखला व श्रावक-श्राविकाओं का शिविर व श्राविकाओं के प्रतिक्रमण व ज्ञान चर्चा व रात्रिकालीन संवर आदि समस्त कार्यक्रम गतिमान हैं ,प्रवचन सभा में चेन्नई के उपनगरों से श्रावक श्राविकाओं की उपस्थिति प्रमोदजन्य रही |