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महासतीजी श्री सुमतिप्रभाजी म.सा का स्वाध्याय भवन साहूकारपेट में मंगल पदार्पण व प्रवचन धर्म आराधना

महासतीजी श्री सुमतिप्रभाजी म.सा का स्वाध्याय भवन साहूकारपेट में मंगल पदार्पण व प्रवचन धर्म आराधना

आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हीराचन्द्र जी म.सा भावी आचार्य पूज्यश्री महेन्द्रमुनिजी म.सा की आज्ञानुवर्तिनी व्याख्यात्री महासतीजी श्री सुमतिप्रभाजी म.सा आदि ठाणा 4 से शुक्रवार 5 दिसम्बर 2025 को स्वाध्याय भवन साहूकारपेट पधारें |

शनिवार 6 दिसम्बर 2025 को महासतीजी श्री वर्षाजी म.सा ने प्रवचन सभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए फरमाया कि प्रभु महावीर ने हमें कैसे जीवन जीए सिखाया हैं | जीने की कला के चार सूत्रों पर विस्तृत विश्लेषण करते हुए फरमाया कि अनासक्त भाव,ज्ञाता दृष्टा भाव,भेद विज्ञान,तटस्थ भावों में रहकर जीना चाहिए | उतराध्ययन सूत्र के पच्चीसवें अध्ययन की गाथा को फरमाते हुए विशेष रुप से अर्थ व सार बताया कि अनासक्त भाव से जीने वाला व्यक्ति भोग भोगते हुए भी भोगी नहीं कहलाता,पाप का सेवन करते हुए भी पापी नहीं कहलाता, कर्म बंध नहीं करता |

बारह चक्रवती में से दस चक्रवती सम्पदा वैभव के होते हुए भी अनासक्त भावों से रहने के कारण मोक्ष पधारें व दो चक्रवती तीव्र आसक्त भावों में रहने के कारण नरक के अधिकारी बनें | ज्ञाता दृष्टा भाव का अर्थ जानना और देखना पर जुड़ना नहीं ,जानना व देखना तो स्वभाव हैं पर हम उनसे जुड़े नहीं | हम संसार में भले ही रहें पर हमारे भीतर संसार नहीं रहे | भेद विज्ञान का विश्लेषण करते हुए आचार्य पूज्यश्री हस्तीमलजी महाराज के प्रिय भजन मेरे अंतर भया प्रकाश,नहीं अब मुझे किसी की आस पर प्रकाश किया | महासतीजी ने फरमाया कि अनुकूलता व प्रतिकूलता दोनों स्थिति में तटस्थ भाव रखें |

महासतीजी श्री तितिक्षाजी म. सा ने फरमाया कि मैं और मेरापन दोनों ही दुःख के मूल कारण हैं | संसार में हर जीव व्यक्ति से वस्तु से पुदगल से राग और द्वेष के कारण ही जुड़ा हुआ हैं और यही दुःख का कारण हैं | मनुष्य भव आसक्ति के भावों व मोह को कम करने के लिए मिला हैं | महासतीजी ने प्रत्याख्यान व सामूहिक नियम कराते हुए मांगलिक फरमाई |

प्रवचन सभा का संचालन वरिष्ठ स्वाध्यायी बन्धुवर श्री नवरतनमलजी चोरडिया ने किया | श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ,तमिलनाडु के निवर्तमान कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने बताया कि प्रवचन सभा में चेन्नई महानगर के अनेक क्षेत्रों से श्रावक श्राविकाओं की सामायिक में उपस्थिति रहीं व महासती मण्डल के दैनिक प्रवचन प्रातःकाल 9.15 बजे से व दोपहर में ज्ञान चर्चा श्रावक व श्राविकाओं के लिए एवं सायंकालीन प्रतिक्रमण मात्र श्राविकाओं के लिए महासती मण्डल के सानिध्य में होंगे |

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