कोडमबाक्कम वड़पलनी श्री जैन संघ में प.पू. सुधा कवर जी मसा आदि ठाणा 5 ने आज शनिवार ता: 29अक्तूबर 2022 को मंगलमयी परमात्मा की मंगलमयी वाणी को आगे बढ़ाते हुए आज “ज्ञान पंचमी पर्व” पर प्रकाश डाला!
उन्होंने फरमाया ज्ञानी पुरुष ज्ञान की आराधना करते हैं जान हमारी आत्मा का गुण है! ज्ञानी पुरुष हर कदम संभाल कर रखते हैं और सुखी रहते हैं! अज्ञानी पुरुष काम गलत करते हैं और गलत सोच विचारधारा, अहंकार के तहत हमेशा दुखी रहते हैं! एक सेठ के 5 पुत्र और 4 पुत्रियां थी जब बच्चे बड़े हुए तो उन्हें विद्यालय भेजना जरूरी था! सेठ समझदार व्यक्ति था इसलिए उसने कैसे भी बच्चों को स्कूल भेज दिया! माता के गलत संस्कारों से प्रेरित बच्चे अपने अध्यापक को पीट देते हैं! सेठ सेठानी के झगड़े में सेठानी की मौत हो जाती है और वह और वह मर कर दूसरे सेठ के यहां गूंगी बनकर जन्म लेती है! सर्वगुण संपन्न एवं गूंगी बच्ची को सेठ उसी गांव में पधारे विजय सेन आचार्य जी, जिनको अवधि ज्ञान प्राप्त था, के पास लेकर जाते हैं!
इस गूंगी कन्या के पूर्व भव मे उसके द्वारा अहंकारी सेठानी के रूप में अत्यधिक धन सम्पदा होने की वजह से अध्यापक को पीटना और किताबों को जला देना इत्यादि.. वजह से ज्ञानावरणीय कर्मों का बन्धन बताया! यह सब सुन रही कन्या मन में घोर पश्चाताप करती है और उसे जातीय स्मरण हो जाता है! इसके बाद आचार्य प्रवर के निर्देश अनुसार 51 लोकेश 51 नमोथुनाम का पाठ 5 महीने तक करके ज्ञान पंचमी की आराधना अनेकों कहते हैं! और ऐसे ही धर्म जान करते हुए वह पुत्री दीक्षा ग्रहण कर लेती है! महाविदेह ज्ञान की आराधना करके ज्ञानावर्णनीय कर्मों का क्षय करती है!
सुयशाश्रीजी मसा फरमाया के मनुष्य के जीवन में अपने द्वारा बोले गए हर शब्द का और शैली का “वाणी” से बडा गहरा संबंध है! राजा अपना भविष्य और अपने मौत के बारे में जानकारी से उत्सुक अपने नगर के सभी हस्त रेखा विद्वानों को बुलाया और एक-एक करके सबको अपनी राय देने के लिए आमंत्रित किया! पहले ज्योतिष ने बताया कि राजा बड़े दुख के साथ कहना पड़ता है कि आपके देखते देखते आपके परिवार के सभी सदस्यों की मौत हो जाएगी!
राजा क्रोधित भी होता है और निराश भी होता है! दूसरे ज्योतिष ने बताया की आपकी उम्र बहुत लंबी होगी आप दीर्घायु एवं चिरायु रहेंगे और लंबे समय तक आप प्रजा की सेवा करते रहेंगे! तात्पर्य दोनों ही ज्योतिषियों का एक ही था लेकिन बोलने की शैली और सही वाणी का उपयोग ना करने की वजह से एक ज्योतिष कटु वचन और एक ज्योतिष मधुर वचन वाला हो जाता है! हमारे नित्यक्रम में कभी ऊंचे बोलते हैं, कभी प्यार से बात करते हैं, कभी गुस्से से करते है, कभी किसी को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति से करते हैं, कभी किसी की अत्यधिक झूठी प्रशंसा करतें हैं! मन में कुछ और चलता है और मुंह से कुछ और निकलता है!
हमारी वाणी में कभी मधुरता, कभी गुस्सा, कभी बदला, कभी कुटिलता और कभी मिथ्या का प्रयोग होता है! पानी को मथने से मक्खन नहीं निकलता, रेत को पीसने से रेत, रेत ही रहेगी!
नीम की कड़वाहट को नमक डालकर और करेले की कड़वाहट को शक्कर डालकर कम किया जा सकता है! वैसे ही हम भी हमारे स्वभाव में सुधार लाकर हमारी वाणी में भी सुधार लाकर बिगड़े हुए संबंधों को भी सुधार सकते हैं! चातुर्मास प्रारंभ से ही गतिमान श्री पार्शव पद्मावती एकासन तप श्री संघ के द्वारा किया गया और एकासना समापन भी आज हुआ बाद में सभी एकासना करने वालो का बहुमान किया गया बहुमान के लाभार्थी तालेड़ा परिवार के द्वारा किया किया गया