तपस्वी भाई-बहन का तपोभिनंदन
आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, मुनि रमेश कुमार, मुनि पद्म कुमार एवं मुनि रत्न कुमार के पावन सान्निध्य एवं तेरापंथी सभा के तत्वावधान में सोमवार को स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में मास्टर लोकेश भंसाली (13 वर्ष) एवं सुश्री प्रेरणा भंसाली (9 वर्ष) (सुपुत्र-सुपुत्री : अमित-सोनिका भंसाली) अठाई (8) की तपस्या के उपलक्ष्य में तपोभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तेरापंथी सभा, गुवाहाटी की ओर से साहित्य एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर तपस्वी भाई-बहन के तप की अनुमोदना की गई।
इस अवसर पर मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने फरमाया कि तपस्या से मनुष्य की भीतरी शक्तियां जागृत होती हैं, जिससे विवेक भी जागृत होता है। तपस्वी व्यक्ति संघ एवं समाज का गौरव बढ़ाता है। मुनि रमेश कुमार ने कहा कि हमारे जीवन में अध्यात्म की भावना पुष्ट बनी रहे, वैसी भावना करते रहें। परिवार में धर्म के संस्कार को आगे बढ़ाना है।
धर्म से ही परिवार, समाज का सर्वांगीण विकास होता है। तपस्वी भाई-बहन के पारिवारिक जनों की ओर से वक्तव्य एवं गीतिका के माध्यम से तप की अनुमोदना की गई। इस अवसर पर अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की महाराष्ट्र प्रभारी निर्मला छाजेड़ (जलगांव)ने तप की अनुमोदना की। कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनि पद्म कुमार ने किया।
नित्य प्रवचन में मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने फरमाया कि जीवन में सरलता परमाश्यक है। सरलता के अभाव में मनुष्य कुटिल बन जाता है। लोगस्स एक शाश्वत सत्य है, यह गणधरों की रचना है। लोगस्स की स्तुति आत्मबोध की प्राप्ति के लिए की जाती है।
मुनि रमेश कुमार ने कहा कि दुनिया में नानात्व है, अनेक रूपता हैं, चार गतियां हैं। नरक, तिर्यंच, मनुष्य और देव। इसमें मनुष्य और तिर्यंच दो गतियां प्रत्यक्ष हैं। नरक और देव गतियां परोक्ष हैं। भगवान महावीर ने सभी आत्माओं को एक समान बताया है। प्रश्न हो सकता है कि जब सब आत्माएं समान हैं तो यह नानात्व क्यों, इसका कारण है हर आत्मा के पुण्य और पाप अलग-अलग होते हैं, इसी कारण जीवों में नानात्व हैं। मुनि रत्न कुमार ने कहा कि हम स्वयं को सुधारेंगे तो घर के बच्चे एवं पड़ोसी अपने आप सुधर जाएंगे।
इससे पूर्व रविवार को सायं मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार एवं मुनि रमेश कुमार के दर्शनार्थ *”असम साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिर्वसिटी* के कुलपति प्रो. नरेंद्र जी चौधरी तेरापंथ धर्मस्थल पहुंचे, जहां अनेक विषयों पर चर्चा की। मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा अध्यात्म और विज्ञान एक दूसरे के पूरक होते हैं। अध्यात्म के साथ विज्ञान होने से नए व्यक्तित्व का निर्माण होता है।
मुनि रमेश कुमार ने कहा कि जैन दर्शन और विज्ञान में बहुत समानताएं हैं। आसाम साइंस एंड टेक्नोलॉजी में जैन आगम एवं आचार्य महाप्रज्ञ की पुस्तकों पर भी रिसर्च होना चाहिए। प्रो. नरेंद्र चौधरी ने कहा आज हम ए आई के युग में जी रहे हैं। यदि अध्यात्म नहीं रहा तो ए आई हमारे समाज के लिए बहुत खतरा बन सकती है। आपने जैन आगमों एवं जैन साहित्य पर शोध करने की इच्छा भी जताई। तेरापंथी सभा की ओर से गामोछा, साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया। इस आशय की जानकारी सभा के मंत्री राजकुमार बैद ने यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दी।
*संप्रसारक*
*जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गुवाहाटी असम*





