श्री हीराबाग जैन स्थानक सेपिंग्स रोड बेंगलुरू में विराजित साध्वी धैर्याश्री जी म सा ने आरुग्ग बोहिलाभमं को अलग अलग तरह से बताया है। बौद्धिक स्तर पर हम अलग अलग कक्षाओं में पढ़ते है, पर हम आध्यात्मिक क्षेत्र में कौनसी कक्षा में हैं हमे देखना है। हम कौन से गुणस्थान में है। गुणस्थान में चढ़ने के लिए समय लगता है, पर गिरने मे समय नही लगता है। सदाचार जीवन का श्रृंगार है।
अनाचार धधकता अंगारा है। व्यक्ति का पैसा गया तो कुछ नहीं, पर स्वास्थ गया तो सब कुछ गया। एक कमजोर कड़ी पूरी जंजीर को खतरे में डाल सकती है। वैसे ही आध्यात्मिक क्षेत्र में आत्मा को ऊपर से नीचे गिरा देती है। संतो की वाणी सुनकर जो संभल जाएगा वही ऊपर उठेगा। जो जीव धरती पर अवतरित होता है, जीवन को जीता है। उसे जीवन को चलाने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। पैट्रोल के बिना गाड़ी नहीं चलती, उसी प्रकार भोजन के बिना शरीर नहीं चलता।
एक व्याक्ति प्रसिद्ध के लिए अधिक धनवान बनने के लिए अनाज संग्रह करता है, भाव आयेंगे तब गोदाम से बाहर निकलूंगा और जो दूसरा है वह दाने दाने के लिए तरसता है। गरीब व्यक्ति भूख लगने पर अन्न को ढूंढता है। जबकि अमीर व्यक्ति भूख को ढूंढते हैं। उसके पास सब कुछ हे परंतु बदहजमी के कारण कुछ खा नहीं सकता। संचालन श्री गौतम जी नाहर ने किया।